जानकारी के अनुसार प्रशासन शहरों के संग अभियान के अन्तर्गत प्राप्त आवेदनों पर नगर परिषद की ओर से स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार पट्टे बनाए जा रहे हैं। इसमें सरकार की ओर से तय शुल्क लिया जा रहा है। अभियान की आड़ में किसी अज्ञात व्यक्ति ने जारी किए जा रहे पट्टों की हूबहू कॉपी प्रिंट कराई और अपने संपर्क में आए लोगों के नाम से पट्टे बनाकर राशि ऐंठ ली।
यों पकड़ में आया मामला
जानकारी के अनुसार नगर परिषद के पेराफेरी क्षेत्र के राजस्व ग्राम टामटिया के गारिया गांव में नगर परिषद के स्वामित्व की भूमि है। इस पर बीते कई सालों से मकान बने हुए हैं। इन मकानों में रहने वाले लोगाें से 15-15 हजार रुपए लेकर अज्ञात व्यक्ति ने प्रशासन शहरों के संग अभियान के अंतर्गत आवासीय भवनों के फर्जी पट्टे दे दिए। बुधवार को एक व्यक्ति पट्टा लेकर सहायक नगर नियोजक मुकुंद रावल के पास पहुंचा। उसने मोबाइल में एक पट्टे का फोटो दिखाकर उसकी कॉपी मांगी। पट्टे पर लगी मोहर पर स्वयं सहित सभापति जैनेन्द्र त्रिवेदी व आयुक्त प्रभुलाल भाबोर के हस्ताक्षर देखते ही पट्टा फर्जी प्रतीत हुआ। उन्होंने उक्त व्यक्ति को रिकार्ड देखकर ही जानकारी दे पाने का तर्क देकर वापस भेज दिया।
मौके पर जाकर एकत्र किए तथ्य
इसके बाद एटीपी रावल ने मामले की जानकारी सभापति त्रिवेदी व आयुक्त भाबोर के दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच के आवश्यक निर्देश दिए। जिस पर सहायक नगर नियोजक रावल के नेतृत्व में गुरुवार को राजस्व निरीक्षक देवेन्द्रपालसिंह चौहान और स्वच्छता निरीक्षक सुरेश डामोर की टीम गारिया पहुंची। यहां गोपनीय तरीके से की गई जांच में एक दंपती सहित तीन लोगों के पट्टों को देखा और उनके फोटो अपने मोबाइल में लिए। यह पट्टे विट्ठल पुत्र मणिलाल पारगी, सुका पत्नी विट्ठल पारगी और जसमाल पुत्र हुरतेंग के नाम से जारी हुए थे।
एसपी को कराया अवगत
मामले में परिषद आयुक्त की ओर से पुलिस अधीक्षक की ओर से गुरुवार को पुलिस अधीक्षक को लिखित में जानकारी दी गई। इसमें बताया कि अज्ञात व्यक्ति ने कुछ लोगों केा नगर परिषद के नाम से फर्जी पट्टे दिए हैं, जबकि इन पट्टों को अभियान में जारी नहीं किया है। पट्टे पर किए गए हस्ताक्षर भी सभापति व परिषद अधिकारियों के नहीं है। कूटरचित पट्टे दिए जाने से आमजन के साथ धोखाधड़ी और परिषद की छवि धूमिल हो रही है। अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
ऑफिस में छुट्टी, पट्टे पर वही तारीख
आरंभिक जांच में जो पट्टे सामने आए, उनमें दो पर 28 नवम्बर की तारीख लिखी थी। उस दिन नगर परिषद में वरिष्ठ पार्षद नाथूलाल हरिजन के निधन कारण अधिकृत अवकाश घोषित किया गया था। पट्टे पर डिस्पेच नंबर भी फर्जी लिखे हैं। नगर परिषद में गुरुवार को डिस्पेच पुस्तिका का क्रमांक आठ हजार 200 से अधिक चल रहा है, जबकि 28 नवम्बर को जारी पट्टे पर डिस्पेच नंबर 1778 व 1779 अंकित है। परिषद में एक दिन में छह हजार से अधिक पत्रावलियाें का आना-जाना व डिस्पेंच में अंकन संभव ही नहीं है। वहीं एक पट्टे पर आवेदक का फोटो भी नहीं है।