वाराणसी में
पढ़ाई के दौरान राजगुरू का सम्पर्क कई क्रान्तिकारियों से हुआ। राजगुरूचन्द्रशेखर
आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन
आर्मी से तत्काल जुड़ गये। आजाद की पार्टी के अन्दर इन्हें रघुनाथ के छद्म-नाम से
जाना जाता था। राजगुरू के नाम से नहीं। पण्डित चन्द्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह और
यतीन्द्रनाथ दास आदि क्रान्तिकारी इनके अभिन्न मित्र थे। राजगुरू एक अच्छे
निशानेबाज भी थे। साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव का पूरा
साथ दिया था जबकि चन्द्रशेखर आजाद ने छाया की भाँति इन तीनों को सामरिक सुरक्षा
प्रदान की थी।