
Shibu Soren
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएस) के प्रमुख और प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को बिहार राज्य के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ। उन्होंने इसी जिले से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। स्कूली शिक्षा के दौरान महाजनों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी।
राजनैतिक जीवन
सोरेन 1970 के दशक में ही राजनीति में कूद पड़े और जल्द ही आदिवासियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। 23 जनवरी 1975 को उन्होंने कथित तौर पर गैर आदिवासी या बाहरी लोगों को इलाके से निकालने के लिए स्थानीय लोगों को भड़काया। इस दौरान करीब 11 लोग मारे गए। सोरेन के साथ अन्य लोगों के खिलाफ इस मामले में केस दर्ज किया गया। काफी लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने सोरेन को 6 मार्च 2008 को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, 1974 में हुई दो हत्याओं का मामला अभी भी उनके खिलाफ चल रहा है।
सोरेन ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1977 में लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ी। हालांकि, तीन साल बाद 1980 में हुए आम चुनाव में उन्होंने अपनी पहली जीत दर्ज की। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 1989, 1991 और 1996 के आम चुनावों में वह जीत दर्ज करने में सफल रहे। 2002 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए। हालांकि, इसी साल दुमका लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में वह जीत दर्ज करने में सफल रहे। जीतने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। 2004 के आम चुनाव में वह फिर यहीं से चुने गए।
वह 2004 में मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने, लेकिन चिरूडीह कांड में वारंट जारी होने के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। इस कांड में 11 लोगों की हत्या हो गई थी। एक महीना न्यायिक हिरासत में रहने के बाद उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई। 8 सितंबर को जमानत मिलने के बाद कांग्रेस-जेएमएम के बीच गठबंधन होने के बाद 27 नवंबर को 2004 को उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया गया और फिर से कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
2 मार्च 2005 को काफी राजनैतिक मशक्कत के बाद झारखंड के राज्यपाल ने उन्हें प्रदेश में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते 9 दिनों बाद 11 मार्च को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उम्र कैद, फिर बरी हुए
शिबू सोरेन को 28 नवंबर 2006 को अपने पूर्व सचिव शशिनाथ झा के हत्या के 12 साल पुराने मामले में दोर्षी करार दिया गया। दावा किया जाता है कि 1994 में झा का दिल्ली के धौला कुंआ इलाके से अपहरण कर लिया गया था और रांची के पास पिस्का नगरी गांव में ले जाकर हत्या कर दी गई। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, 1993 में तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के लिए जेएमएम और कांग्रेस के बीच जो डील हुई थी, झा को इसकी जानकारी थी और इसलिए उनकी हत्या कर दी गई। चार्जशीट में आगे कहा गया कि झा ने सोरेन से चुप रहने के लिए सौदेबाजी की थी। मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मनमोहन सिंह ने उन्हें कैबिनेट से इस्तीफा देने के लिए कहा जिसके बाद उन्हें अपना पद छोडऩा पड़ा। यह पहला मामला था जब भारत सरकार के किसी मंत्री को सजा सुनाई गई। 5 दिसंबर 2006 को सोरेन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ कई और मामले भी चल रहे हैं इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
27 जून 2007 को जब सोरेन को झारखंड की दुमका जेल ले जाया जा रहा था तब उनके काफिले पर बम से हमला किया गया। हालांकि, इस हमले में किसी को चोट नहीं आई। उम्र कैद की सजा के खिलाफ सोरेन ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने 23 अगस्त 2007 को जिला कोर्ट का फैसला पलटते हुए सोरेन को बरी कर दिया।
झारखंड सीएम
मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रहने के अलावा शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। पहली बार वह 2 मार्च 2005 को सीएम बने, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के चलते महज 9 दिन तक ही इस पद पर बने रह सके। इसके बाद मधु कोड़ा को जबरन पद से हटवा कर 27 अगस्त 2008 को दूसरी बार सीएम बने और 18 जनवरी 2009 तक इस पद पर रहे। इसी साल 30 दिसंबर को उन्होंने सीएम पद की फिर से शपथ ली और चार महीने-31 मार्च 2010 तक इस पद पर बने रहे।
Published on:
11 Jan 2016 01:32 am

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