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पटियाला के महाराजा अमरिंदर सिंह का आज है हैप्पी बर्थडे

वर्तमान में वह पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता हैं

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Jameel Ahmed Khan

Mar 11, 2016

Amarinder Singh

Amarinder Singh

पटियाला। इंडियन नेशनल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह का जन्म 11 मार्च, 1942 को पटियाला के महाराजा यदविंदर सिंह और महारानी मोहिंदर कौर के घर हुआ। पूर्व पटियाला राजघराने के सदस्य, अमरिंदर सिंह 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में वह पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता हैं। वह अमृतसर से सांसद हैं। यहां से उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता और वित्तमंत्री अरुण जेटली को हराया था। उन्होंने वेलहेम बॉयज स्कूल, स्नोवर स्कूल और फि दून स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। उनका एक बेटा और एक बेटी है। उनकी पत्नी प्रिनीत कौर सांसद रह चुकी हैं और मनमोहन सिंह सरकार में 2009-14 विदेश राज्यमंत्री थीं। प्रिनीत कौर की बहन की शादी शिरोमणी अकाली दल नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी सिमरनजीत सिंह मान से हो रखी है। अमरिंदर की बढ़ी बहन हेमिंदर कौर पूर्व विदेशमंत्री नटवर सिंह की पत्नी हैं।

सेना में करियर
नेशनल डिफेंस अकादमी और फिर इंडियन मिलिट्री अकादमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जून 1963 में सेना में अफसर के रूप में शामिल हुए। हालांकि, 1965 के शुरुआत में उन्होंने सेना से इस्तीफा दे दिया, लेकिन इसी साल भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू होने के चलते वह फिर से सेना में कैप्टन के रूप में शामिल हो गए।

राजनैति करियर
अमरिंदर सिंह को कांग्रेस में राजीव गांधी ने शामिल किया जो स्कूल से उनके दोस्त थे। अमरिंदर पहली बार 1980 में लोकसभा के लिए चुने गए। ऑपरेशन ब्लू स्टार का विरोध करते हुए उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह शिरोमणी अकाली दल (एसएडी) में शामिल हो गए। एसएडी की टिकट पर वह तलवंडी साबो से पंजाब विधानसभा के लिए चुने गए। प्रदेश सरकार में वह मंत्री बनाए गए। उन्हें कृषि, पंचायत, विकास और वन जैसे अहम मंत्रालयो की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1992 में अकाली दल से अलग होकर उन्होंने शिरोमणी अकाली दल (पैंथिक) पार्टी का गठन किया। हालांकि पंजाब विधानसभा में उनकी पार्टी को मिली करारी हार के बाद उन्होंने 1998 में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर लिया। इन चुनाव में वह खुद भी हार गए थे। उन्हें महज 856 मत मिले। वह दो बार पहले भी पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। पहली बार 1999 से 2002 तक और फिर 2010 से 2013 तक वह इस पद पर रहे। वह 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे।

सितंबर 2008 में जमीन घोटाले को लेकर अकाली-भाजपा ने उन्हें विधानसभा से निष्कासित कर दिया। हालांकि, उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोट ने इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता बहाल कर दी। 2014 के आम चुनाव में उन्होंने अमृतसर से भाजपा के अरुण जेटली को एक लाख 2 हजार मतों से हराया। वह पांच बार पंजाब विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। 27 नवंबर, 2015 को उन्हें पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

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