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भूमध्य सागर की गहराइयों में मिला छिपा हुआ प्लास्टिक कब्रिस्तान

समुद्र की सतह हमेशा साफ दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। लहरों के नीचे, समुद्र की गहराइयों में एक और कहानी छिपी है। दक्षिण-पूर्वी भूमध्य सागर की गहराइयों में समुद्र की तली अब प्लास्टिक कचरे, खासकर थैलियों और पैकेजिंग, का विशाल भंडार बनती जा रही है।

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जयपुर। समुद्र की सतह हमेशा साफ दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। लहरों के नीचे, समुद्र की गहराइयों में एक और कहानी छिपी है। दक्षिण-पूर्वी भूमध्य सागर की गहराइयों में समुद्र की तली अब प्लास्टिक कचरे, खासकर थैलियों और पैकेजिंग, का विशाल भंडार बनती जा रही है। एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि यह कचरा हजारों फीट नीचे कैसे पहुंचता है, और इसका कारण सिर्फ “कचरे का डूब जाना” नहीं है।

गहरे समुद्र में प्लास्टिक
अब तक ज्यादातर शोध सतह पर तैरते प्लास्टिक या किनारे पर बिखरे कचरे पर केंद्रित रहे थे। लेकिन इस नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने समुद्र की तलहटी की सच्चाई देखी।

उन्होंने पाया कि इस्राइल, मिस्र और तुर्की के तटों के पास स्थित लेवांत बेसिन दुनिया के सबसे ज्यादा दूषित गहरे समुद्री क्षेत्रों में से एक है।
अध्ययन के अनुसार, यहां ट्रॉलिंग कर जब समुद्र की तलहटी का सर्वे किया गया तो ज्यादातर जगह प्लास्टिक बैग और पैकेजिंग सामग्री ही मिली।

हल्का प्लास्टिक इतनी गहराई में कैसे पहुंचा?
शोधकर्ताओं ने हर प्लास्टिक टुकड़े को जैसे अपराध स्थल का सबूत मानकर जांचा। आकार, रंग, सतह, किस तरह की चीजें उससे चिपकी हुई थीं—सबका बारीकी से विश्लेषण किया गया।

ज्यादातर प्लास्टिक पॉलीथीन से बने थे, जो आमतौर पर पानी पर तैरते हैं। लेकिन जब निर्माण के समय इनमें कैल्शियम कार्बोनेट जैसे तत्व मिलाए जाते हैं तो ये भारी होकर डूब जाते हैं।

अध्ययन से यह भी पता चला कि 3000 फीट से ज्यादा गहराई वाला यह बेसिन एक तरह का फंदा है, जहां दबाव और बारीक मिट्टी प्लास्टिक को नीचे ही रोके रखती है।

कचरा कहां से आ रहा है?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस प्रदूषण का बड़ा हिस्सा मिस्र, इस्राइल और तुर्की से आ रहा है। गहरे पानी में जहाज़रानी भी एक कारण है। चौंकाने वाली बात यह है कि मछली पकड़ने से इसमें बड़ा योगदान नहीं मिला, संभवत: इस्राइल के सख्त नियमों की वजह से।

इस्राइल की समुद्री अनुसंधान संस्था की डॉ. याएल सेगल ने कहा—
“हमारी रिपोर्टों में वर्षों से इस इलाके में समुद्र की तली पर प्लास्टिक की उच्च मात्रा दर्ज होती रही है। पहले यह रहस्य था कि सतह पर तैरने वाला कचरा नीचे कैसे पहुंचता है। अब हमें इसकी गहरी समझ मिली है।”

समुद्री जीवन पर खतरा
प्लास्टिक पैकेजिंग सस्ती और आसानी से बनने वाली है, लेकिन यह कभी नष्ट नहीं होती। यह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर सैकड़ों सालों तक पर्यावरण में बनी रहती है।
समुद्र की गहराइयों का नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र इससे गहरे खतरे में है। यह भोजन श्रृंखला बिगाड़ सकता है, जहरीले तत्व फैला सकता है और उन प्रजातियों को नुकसान पहुंचा सकता है जिन पर अभी तक पर्याप्त अध्ययन भी नहीं हुआ है।

प्रोफेसर रेविटल बुकमैन ने कहा—
“पूर्वी भूमध्य सागर धीरे-धीरे गहरे समुद्र का लैंडफिल बनता जा रहा है। कुछ मिनट इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक वहां सदियों तक फंसा रहकर पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल रहा है।”

आगे क्या होना चाहिए
अध्ययन के अनुसार, अब हमें समुद्री प्रदूषण को सिर्फ तैरते हुए कचरे या किनारों तक सीमित सोचकर नहीं देखना चाहिए। प्लास्टिक अन्य प्रदूषकों के साथ मिलकर गहराइयों तक पहुंच रहा है और छिपे हुए कब्रिस्तानों की शक्ल ले रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र के देशों—इस्राइल, मिस्र और तुर्की—को मिलकर निगरानी, सफाई और रोकथाम के कदम उठाने होंगे।
वरना, समुद्र की गहराइयों में यह प्लास्टिक चुपचाप जमा होता रहेगा और धरती के सबसे रहस्यमयी पारिस्थितिक तंत्र को धीरे-धीरे घोंटता रहेगा। यह अध्ययन Marine Pollution Bulletin जर्नल में प्रकाशित हुआ है।