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चीन में तस्करी से भारत में इंसानी बालों का व्यापार हो रहा चौपट

चीनी व्यापारी आयात मूल्य पर 30 प्रतिशत शुल्क और करों के भुगतान से बचने के लिए बालों की तस्करी का विकल्प चुनते हैं।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jul 13, 2023

चीन में तस्करी से भारत में इंसानी बालों का व्यापार हो रहा चौपट

चीन में तस्करी से भारत में इंसानी बालों का व्यापार हो रहा चौपट

नई दिल्ली। चीन, अमरीका और यूरोपीय देश भारतीय बालों के सबसे बड़े खरीदार हैं। ये देश इन बालों से स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए विग और अन्य उत्पाद बनाते हैं। लेकिन बांगलादेश, म्यांमार के रास्ते चीन में बड़े पैमाने पर तस्करी के कारण भारत का ह्यूमन हेयर ट्रेड खतरे में है और मुनाफा भी घट रहा है। पहले चीनी कंपनियां भारतीय व्यापारियों से वैध तरीके से प्रति किलो 200 डॉलर के हिसाब से बाल खरीदती थीं। लेकिन वे अब स्थानीय एजेंटों को नियुक्त कर रही हैं, जो 60-70 डॉलर प्रति किलो की दर से हेयर बॉल्स खरीदते हैं, जिनकी बाद में बांगलादेश में तस्करी होती है। इससे स्थानीय उद्योग को नुकसान होने के साथ-साथ भारत बड़ी मात्रा में टैक्स से होने वाली आय खो रहा है।

भारतीय अकुशल श्रमिकों की आय पर असर:

ह्यूमन हेयर ट्रेड से अकुशल श्रमिक बड़ी तादाद में जुड़े हुए हैं। बालों के कारोबारी श्रमिकों से बॉल्स एकत्र करके बाद में इन्हें छोटी वर्कशॉप में सेमी-प्रोसेस्ड कराते हैं। हेयर बॉल्स को गोली या चुट्टी कहते हैं। इनमें 4-40 इंच के बाल शामिल होते हैं। सेमी-प्रोसेसिंग के दौरान बालों को लंबाई व मोटाई के हिसाब से सीधा करने से पहले धोया और व्यवस्थित किया जाता है। लेकिन अब हेयर बॉल्स को बांग्लादेश में तस्करी कर ले जाया जा रहा है। यहां सस्ते लेबर की वजह से बालों की प्रोसेसिंग फायदेमंद रहती है, फिर इन्हें चीन में बिक्री के लिए भेजते हैं। कई बार बाल म्यांमार के रास्ते चीन ले जाए जाते हैं। पिछले तीन सालों में पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तस्करी के कारण कई छोटी हेयर-प्रोसेसिंग वर्कशॉप बंद होने से साढ़े पांच लाख से ज्यादा भारतीयों की नौकरी चली गई।

चीन की चालाकी से बढ़ा अवैध व्यापार:

चीनी व्यापारी आयात मूल्य पर 30 प्रतिशत शुल्क और करों के भुगतान से बचने के लिए बालों की तस्करी का विकल्प चुनते हैं। म्यांमार में 2012 की शुरुआत से ही भारतीय बालों की तस्करी हो रही है। लेकिन अब चीनी आयातकों ने गत पांच सालों में सस्ते स्थानीय श्रम का उपयोग करके बांगलादेश में प्रोसेसिंग प्लांट्स लगा दिए हैं, जिससे यहां तस्करी बढ़ी है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल के लिए इंसानी बालों की तस्करी नया सिरदर्द बन गई है। सिर्फ 2021 में ही बांगलादेश में तस्करी के दौरान लगभग 400 किलो मानव बाल जब्त किए गए थे। तस्करी के कारण केंद्र सरकार ने पिछले साल बालों के निर्यात पर सख्ती बढ़ाई थी।

तस्करी रुके तो सालाना तीन अरब डॉलर हो कमाई:

भारतीय निर्यात के पांच फीसदी से अधिक बेहतरीन गुणवत्ता वाले बालों को 'रेमी हेयर' कहा जाता है। इन्हें दक्षिण भारत के मंदिरों से इकट्ठा किया जाता है। भारत जो बाकी निर्यात करता है वह गैर-रेमी, बचे हुए बाल हैं। ये अक्सर ब्यूटी पार्लर, नकदी या बर्तन के बदले में प्राप्त किए जाते हैं। भारत ने इस साल अब तक चीन और अमरीका को 60.78 करोड़ डॉलर मूल्य के बालों और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया है। अगर मुनाफे और आयकर को नुकसान पहुंचा रही तस्करी पर रोक लगे तो देश सालाना तीन अरब डॉलर कमा सकता है।

क्या-क्या बनाता है चीन: विग और हेयर एक्सटेंशन के लिए विश्व स्तर पर भारतीय बालों को पसंद किया जाता है क्योंकि ये हल्के, चमकदार और बाउंसी होते हैं। चीनी कंपनियां भारतीय बालों का प्रयोग वैश्विक बाजार के लिए विग, एक्सटेंशन, पलकें, पेंट ब्रश, नकली दाढ़ी और मूंछें बनाने में करती हैं।

इंसानी बालों के प्रमुख निर्यातक