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इंदौर जैसी त्रासदी का खतरा जयपुर में! सीवर-नाले के पानी से खेती, स्वास्थ्य पर बड़ा संकट

देश के सबसे स्वच्छ शहर में शुमार इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे और दूषित पानी पीने से दर्जनभर से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटना सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि जयपुर में भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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Ashwani Bhadauria

Jan 02, 2026

जयपुर. देश के सबसे स्वच्छ शहर में शुमार इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे और दूषित पानी पीने से दर्जनभर से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटना सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि जयपुर में भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं। राजधानी के सांगानेर-जगतपुरा और जयसिंहपुरा क्षेत्रों में लंबे समय से सीवर और नालों के पानी से खेती की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति इंदौर जैसी त्रासदी को जयपुर में भी जन्म दे सकती है।

इंदौर: लोग पहले बीमार हुए, फिर चली गई जान
सरकारी रिपोर्ट में साफ हो गया कि दूषित पानी पहले लोग बीमार पड़े और फिर उनकी मौत हो गई। पाइप लाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ। भागीरथपुरा में करीब 1400 लोगों को इन्फेक्शन भी हुआ है।

जयपुर: नालों के गंदे-केमिकल युक्त पानी से कर रहे सिंचाई
सांगानेर-जगतपुरा क्षेत्र में सीवर लाइन से पानी खींचकर खेतों में सिंचाई की जा रही है। सीवर लाइन को बंद तक कर देते हैं। इसके अलावा नालों के गंदे और केमिकल युक्त पानी को मोटर पंप से खींचकर सीधे फसलों तक पहुंचाया जा रहा है। इस गंदे पानी से जो सब्जियां तैयार हो रही हैं, उनको शहर में भेजा रहा है।

सब्जियों के जरिए शरीर में जहर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो सीवर और नाले के पानी में भारी धातुएं होती हैं। इससे पेट संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग, लिवर-किडनी संक्रमण, कैंसर जैसी बीमारी होने की भी संभावना रहती है। बच्चों की ग्रोथ भी प्रभावित होती है।

निगरानी तंत्र पर सवाल
प्रदूषण नियंत्रण मंडल फैक्टरी संचालकों को नोटिस जारी कर देता है। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती।

ये जरूरी
-सीवर और नाले के पानी से खेती पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए
-सिंचाई जल की नियमित रूप से जांच की जाए
-किसानों को ट्रीटेड वॉटर या वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराया जाए
-मंडियों में आने वाली सब्जियों की गुणवत्ता जांची जाए