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ध्यान से होती है ज्ञान की वृद्धि

जबलपुर में विद्यासागर महाराज ने समझाया जीवन का मर्म

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Aachary Vidhyasagar Maharaj in Jabalpur

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जबलपुर। 'हम ज्ञान के स्वरूप को नहीं समझते। यही कारण है कि हम उसके मूल तत्व को नहीं समझते। जिस तरह खुशबू की चोरी नहीं की जा सकती, लेकिन खुशबू को सभी लोग ग्रहण करते हैं। हजारों लोगों की सभा में यदि एक कोने में हवा की दिशा में एक अगरबत्ती लगा दी जाए तो उसकी खुशबू चारों ओर फैलती है। यही स्थिति ज्ञान की है।Ó तिलवाराघाट स्थित दयोदय तीर्थ गोशाला में चातुर्मास के लिए विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहीं। आचार्यश्री ने कहा कि ध्यान से ज्ञान की वृद्धि होती है। ध्यान अवश्य लगाना चाहिए। ध्यान लगाते समय वातावरण साफ, स्वच्छ, शीतल और अनुकूल होना चाहिए। बाग बगीचे में झाडिय़ों, फूल, पौधों से शीतलता मिलती है। शीतल वायु चारों ओर बहती है। इसलिए खुली जगह पर शांत चित्त से ध्यान लगाना चाहिए। ध्यान लगाते समय एक आसन में बैठकर समय, काल परिस्थिति सब भूल जाएं। तभी आपको समयसार के दर्शन होंगे। यह ध्यान करने वाले जानते हैं।

आचार्यश्री कहा कि सुगंध इत्र में भरी होती है। इत्र के गुण जो सुगंध के रूप में होते हैं, उसे खरीदा तो जा सकता है, लेकिन उसकी सुगंध को फैलने से रोका नहीं जा सकता। हजारों सूक्ष्म से सूक्ष्म कण सुगंध को चारों ओर फैला देते हैं। इसी तरह ज्ञान रूपी सुगंध चारों ओर फैलती है। उन्होंने कहा कि केवल ग्रही कहते हैं कि मैं तो ज्ञान फैला रहा हूं। ग्रहण करने वाले यदि ग्रहण नहीं करते तो ज्ञान बेकार है। हमें अपने आप को ग्राह करने वाले यंत्र के रूप में विकसित करना चाहिए। ध्यान से सुनो उसे अपने अंत:करण में उतारो। आप लोग जो पूजा करते हैं, पूजा की सुगंध उसी को आती है जिसने उसे ग्रहण किया है। जिसने उसे ग्रहण किया ही नहीं तो पूजन सामग्री चढ़ाते जाइए, कोई प्रभाव नहीं पड़ता।