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अमरीकियों से घिरे सद्दाम की कविता- अपनी तलवार निकाल लो…

पहली बार पत्रिका.कॉम लाया है सद्दाम हुसैन की कविताएं हिंदी में (हिंदी तर्जुमा: आवेश तिवारी)

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Saddam Hussein

हिंदी तर्जुमा: आवेश तिवारी।

ईराकी तानशाह सद्दाम हुसैन अपने जीवन के आखिरी दिनों में नियमित तौर पर कवितायें लिखता था। दिलचस्प यह है कि एफबीआई के जिस एजेंट जार्ज पिरो को सद्दाम से पूछताछ में लगाया गया था वह खुद सद्दाम की कविताओं का दीवाना हो गया था। अमरीकी सरकार सद्दाम हुसैन से दो सवालों के ही जवाब चाहती थी जिनमें पहला यह था कि उसने सामूहिक नरसंहार के हथियार कहां छिपा कर रखे हैं? और दूसरा सवाल यह था कि उसके अलकायदा से क्या सम्बन्ध हैं?
पिरो ने सद्दाम को फांसी देने के बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि जब मैंने सद्दाम से कवितायें सुनी तो पूछा कि इतनी अच्छी कवितायें लिखने वाला सामूहिक नरसंहार के हथियार क्यों बनाता है? इस पर सद्दाम ने कहा "यह एक अफवाह है जो मैंने इस लिए फैलाई कि ईरान हमसे डरकर रहे, जहां तक अलकायदा का सवाल है मैं राजनीति को धर्म से जोडऩे का विरोधी हूं।" "सद्दाम हुसैन" की आखिरी कविताओं का अनुवाद पहली बार हिंदी में पढि़ए-

-19 मार्च 2003 को अमेरिकी फौज द्वारा इराक की राजधानी बगदाद पर हमले के बाद सद्दाम ने देश के नाम सन्देश में यह कविता पढ़ी-