
पांच किलोमीटर दूर सैंट्रल लैब में भेजे जाते हैं पैथोलॉजी सैंपल
जिले के सबसे बड़े जनाना अस्पताल में मरीजों को निशुल्क जांच योजना का फायदा नहीं मिल पा रहा है। वजह अस्पताल में पैथोलॉजी जांच सुविधा नहीं होना है। जिससे मरीज को यहां भर्ती करने के बाद सैंपल जांच के लिए पांच किलोमीटर कल्याण अस्पताल में भेजे जाते हैं। सैंट्रल लैब में दो समय सेम्पल भिजवाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बावजूद जनाना अस्पताल से दोपहर बाद ही पैथोलॉजी के सैम्पल भिजवाए जा रहे हैं। कई बार सैम्पल के समय पर नहीं पहुंचने से क्लॉटिंग जैसे समस्या आ रही है। जिससे कई सैम्पल रीपिट करवाने पड़ते हैं। ओपीडी समय में आने वाले मरीजों की जांच हो जाती है लेकिन गंभीर मरीज को निजी लैब में ही पैथोलॉजी जांच करवानी पड़ती है। जिससे मरीजों को निशुल्क जांच योजना का पूरा फायदा नहीं मिल पाता है। जनाना अस्पताल के चिकित्सक रोजाना औसतन करीब 30 से 40 मरीजों की पैथोलॉजी जांच करवाते है। जनाना अस्पताल में हर समय औसतन दो सौ से ढा़ई मरीज भर्ती रहते हैं। वहीं एक हजार से ज्यादा का आउटडोर रहता है।
नहीं मिल पाता है इलाज
मरीजों के अनुसार सरकार निशुल्क जांच योजना के जरिए लोगों को राहत देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। जांच में देरी और कई बार गलत रिपोर्ट से मरीजों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिससे मरीज का न तो समय पर इलाज हो पाता है, न ही उन्हें मरीज की सही स्थिति की जानकारी मिलती है।
इन जांचों के लिए परेशानी
मौजूदा जीवनशैली के कारण शरीर में कई हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। जिससे मरीज के शरीर में संक्रमण कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में हार्मोनल और पैथोलॉजी में शामिल एचबी, टीएलसी, एचबी,ईएसआर सरीखी जांच करवानी जरूरी होती है। कई बार मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में संक्रमण की जांच होना बेहद जरूरी हो जाता है। जिससे मरीज का सटीक उपचार हो सकेगा।
स्टॉफ की कमी के कारण मरीजों को होती है परेशानी
अस्पताल में पैथोलॉजी के सैंपल जांच के लिए कल्याण अस्पताल सैंट्रल लैब भेजे जाते हैं। स्टॉफ की कमी के कारण कई बार मरीजों को परेशानी होती है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है।
मनोज धायल, प्रभारी जनाना अस्पताल
Published on:
01 May 2025 11:27 am
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