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घोड़ा पछाड़ नदी में नाव डूबी, अब कैसे जाएंगे बच्चे स्कूल

कस्बे से गुजर रही घोड़ा पछाड़ नदी वर्षो से स्कूल पहुंचने से पहले बच्चों का हर दिन इतिहान लेती आ रही है। कभी नाव डूबती हैं तो कभी बाढ़ रास्ता रोक देती हैं। ऐसे में नदी पर नावघाट से क़स्बे में आवागमन के लिए एक मात्र नाव ही सहारा बनी हुई हैं।

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बूंदी

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pankaj joshi

Jul 04, 2024

घोड़ा पछाड़ नदी में नाव डूबी, अब कैसे जाएंगे बच्चे स्कूल

बरुंधन , नावघाट घोड़ापछाड नदी तट पर बंद पड़ा आवागमन

बूंदी. बरुन्धन.कस्बे से गुजर रही घोड़ा पछाड़ नदी वर्षो से स्कूल पहुंचने से पहले बच्चों का हर दिन इतिहान लेती आ रही है। कभी नाव डूबती हैं तो कभी बाढ़ रास्ता रोक देती हैं। ऐसे में नदी पर नावघाट से क़स्बे में आवागमन के लिए एक मात्र नाव ही सहारा बनी हुई हैं।

इसी नाव में बैठकर खतरो के बीच जान जोखिम में डालकर बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए नदीपार स्कूल जाने को मजबूर हैं। वहीं अपने नौनिहालों के लिए हमेशा अभिभावकों में चिंता बनी रहती हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों के बावजूद कुछ दिन पहले हुई बरसात से नाव नदी में डूबने के साथ ही ग्रामीणों के आवागमन का सहारा भी छिन गया, जिसके साथ ही बच्चों के सामने स्कूल जाने का भारी संकट खड़ा हो गया। जिला कलक्टर को भी कराया अवगत

जिला कलक्टर को बुधवार को सौंपे ज्ञापन में लोगों ने बताया कि नदी पार करीब 300 घरों की बस्ती है, जिसमें करीब 1600 की आबादी निवास करती है। यहां पर मात्र प्राथमिक विद्यालय है, इसके बाद की शिक्षा के लिए बच्चों को बरूंधन जाना पड़ता है। बरूधन और इस बस्ती के बीच घोड़ा पछाड़ नदी है, जिसमें वर्तमान में काफी पानी भरा हुआ है। बच्चे आगे की शिक्षा इस बस्ती से बरूंधन तक नाव से आते-जाते हैं, नदी में पानी का तेज बहाव आने से उक्त नाव भी पानी में डूब चुकी है।

दो माह से बंद है पुल का कार्य
उक्त बस्ती से बरुधन तक आने जाने के लिए करीब 7 8 माह पूर्व नदी पर हैंगिंग ब्रीज का कार्य शुरू हुआ था, जो करीब 2 माह से बद है। इस बस्ती के करीब 300 बच्चों की उच्च शिक्षा के नदी पार करने का कोई अन्य मार्ग नहीं है। यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो बच्चों की शिक्षा बाधित हो जाएगी। जब तक ब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो जाए, तब तक बच्चों के आने जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाए जाए।

नहीं पहुंच पा रहे बच्चे स्कूल
नाव नहीं मिलने से करीब दो सौ बच्चे पढ़ाई से वंचित व चिंतित हो रहे हैं। गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के साथ ही बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।जानकारी के अनुसार15 किलोमीटर का रास्ता तय कर राउमावि में केवल दो बच्चे ही पहुंच सके हैं। नदी में 12 माह इतना पानी रहता है कि बिना नाव व पुलिया के पार नहीं किया जा सकता।

पुल बनने से मिलेगी निजात
कुछ माह पूर्व नदी पर पुलिया निर्माण का काम शुरु हुआ था, जिससे लोगों को पुरी उमीद है कि इस बार बारिश से पहले पुल निर्माण होने से समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन दो माह से भी ज्यादा समय से निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है।

नाव या पुलिया की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे है। नदी पार से नाव में बैठकर बरुंधन कस्बे में आने वाले विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाएंगे।
रामचरण राठौर, प्रधानाचार्य,राउमावि, बरुंधन