
99 साल लीज की बंदिशें खत्म, मिलेगा फ्री होल्ड पट्टा
श्रीगंगानगर.
शहरी क्षेत्र और आस-पास बसी कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में भूखण्डधारियों को अब फ्री होल्ड पट्टा मिलेगा। यूं समझे की 99 वर्ष की लीज की बंदिश खत्म कर दी गई है। निर्धारित लीज राशि एकमुश्त जमा कराकर भूखंडधारी उस भूखंड का मालिक होगा। स्वायत्त शासन विभाग ने इसके नियम नोटिफाइड कर दिए हैं। इसके तहत आवासीय भूखंड के लिए 10 साल और व्यावसायिक भूखंड के लिए 12 वर्ष की एक मुश्त लीज जमा कराकर फ्री होल्ड का हक मिलेगा। नगरपालिका एक्ट में बदलाव कर फ्री होल्ड पट्टे के पंजीयन संबंधी नियम भी जोड़े गए हैं।
इसी तरह नगर विकास न्यास क्षेत्र में ऐसे पट्टों की कवायद शुरू होने वाली है। जयपुर के जेडीए के अतिरिक्त आयुक्त और तत्कालीन यूआईटी सचिव रहे ओपी बुनकर ने बताया कि जेडीए फ्री होल्ड पट्टा जारी कर रहा है। यह प्रक्रिया अब यूआईटी और नगर परिषद क्षेत्र में स्थित भूखण्डों को फ्री होल्ड पट्टा मिल सकेगा। उनका कहना था कि म्यूनिसिपल एक्ट में बदलाव तो कर दिया था लेकिन नियम जारी नहीं किए थे। इस कारण से निकाय फ्री होल्ड पट्टा जारी नहीं कर पा
रहे थे।
इस तरह मिलेगा हक
फ्री होल्ड पट्टे के लिए तय लीज राशि (एक साथ 8 वर्ष की लीज) की आवासीय के लिए 1.25 गुणा और कॉमर्शियल के लिए 1.5 गुणा राशि चुकाना होगा। यह राशि 10 व 12 वर्ष की लीज राशि के अनुपात में होगी।
नगर परिषद
नगर परिषद एरिया में अनुमानित 24 हजार भूखण्ड हैं। इसमें ब्लॉक एरिया, मुख्य बाजार एरिया, पुरानी आबादी, 13 कच्ची बस्तियों का एरिया शामिल किया गया है। इन भूखण्डों के पट्टे नगर परिषद प्रशासन करता है।
नगर विकास न्यास
यूआईटी की खुद की 15 कॉलोनियों में करीब 9 हजार और कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में लगभग 23 हजार भूखण्ड है। कुल 31 हजार भूखण्डों में न्यास प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले पट्टे 99 ***** लीज वाले है।
अंतर जानें
लीज-होल्ड प्रॉपर्टी
इसके तहत प्रॉपर्टी का मालिकाना हक एक तय समय के लिए ही खरीददार को ट्रांसफर किया गया है। आम तौर पर यह समय सीमा 99 साल की होती है। समय सीमा समाप्त होने के बाद मालिकाना हक दोबारा पहले पक्ष के पास चली जाती है। डीड का रजिस्ट्रेशन खरीददार के नाम से ही होता है, लेकिन लीज समय पूरा होने के बाद दोबारा रिन्यूअल कराना पड़ता है।
फ्री-होल्ड प्रॉपर्र्टी
इसके तहत प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हमेशा के लिए खरीददार के पास होता है। उसके इस मालिकाना हक में किसी विभाग का हस्तक्षेप नहीं हो सकता। देश में ज्यादातर प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड हैं। ज्यादातर राज्य सरकारों ने इस तरह की व्यवस्था लागू कर दी है। हालांकि कुछ मेट्रो शहरों में लीज-होल्ड व्यवस्था अब भी है।
&यह सही है कि यूआईटी की ओर से दिए जाने वाले भूखण्डों के पट्टे 99 साल लीज वाले है। राज्य सरकार फ्री होल्ड का सिस्टम खत्म करने जा रही है लेकिन हमारे पास अभी तक इस संबंध में अधि सूचना या आदेश की प्रति अभी तक नहीं आई है। इस कारण अब भी 99 साल लीज के आधार पर मालिकाना हक वाले पट्टे जारी किए जा रहे है।
-कै लाशचन्द्र शर्मा, सचिव, नगर विकास न्यास।
Published on:
21 Jun 2018 08:00 am
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