
बाल वाहिनी: नौनिहालों की खतरे में जान
-हादसे रोकने के लिए शिक्षा,परिवहन,पुलिस और जिला प्रशासन जिम्मेदार--बाल वाहिनी: नौनिहालों की खतरे में जान
श्रीगंगानगर. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर कम होने पर स्कूल फिर से खुल चुके हैं। इसी के साथ हादसे होने शुरू हो चुके हैं। लापरवाही की वजह से गुरुवार को जैसलमेर में दो नौनिहालों की जिंदगी चली गई। यह कोई पहली बार घटना नहीं हुई है। हर जिले में बार-बार अनफिट बाल-वाहिनी और चालकों की लापरवाही से विद्यार्थियों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। इस बीच कई बार हादसा होने पर विद्यार्थियों की जान तक चली गई। इसके बावजूद विभाग कोई सबक नहीं ले रहा है। श्रीगंगानगर जिले में करीब 700 से अधिक बाल-वाहिनी है। अब परिवहन विभाग बाल-वाहिनी की जांच की खानापूर्ति करने के लिए दस दिवसीय विशेष अभियान चलाएगी। पिछले वर्ष अक्टूबर में चलाए अभियान में कई बाल-वाहिनी की जांच करने पर चालान काटने की कार्रवाई की गई।
श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय सहित हर ब्लॉक में बाल-वाहिनी में स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। अवैध बाल वाहिनी की संख्या भी कम नहीं है। जबकि इन हादसों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग,परिवहन विभाग,पुलिस और जिला प्रशासन के स्थानीय अधिकारी ही जिम्मेदार है। उल्लेखनीय है कि जिले में बाल-बाहिनी का फिटनेस व परमिट आदि की जांच के लिए अभियान चलाकर जांच करने के निर्देश हैं लेकिन इन पर संबंधित विभाग ने खानापूर्ति की गई है।
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अब फिर से चलाया जाएगा विशेष अभियान
परिवहन एवं सडक़ सुरक्षा विभाग के परिवहन आयुक्त एवं विशिष्ट शासन सचिव महेंद्र सोनी ने एक आदेश जारी कर छात्र-छात्राओं को सुरक्षित व सुविधानजक सुलभ वाहन व्यवस्था उपलब्ध करवाने के लिए हर जिले में बाल-वाहिनी जांच के लिए दस दिन तक विशेष अभियान चलाएगा। इसके लिए जिला परिवहन अधिकारी को निर्देशित किया गया है।
आयुक्त के परिपत्र में निर्देशित किया है कि सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाने,दुर्घटनाओं से होने वाली जनधन की अपूरणीय क्षति को कम करने,आम जनता में यातायात नियमों के प्रति जागरुकता लाने एवं सडक़ दुर्घटनाओं के कारकों में से एक बाल-वाहिनी श्रेणी के वाहनों के अवैध संचालन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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पिछले वर्ष अक्टूबर में चलाया था अभियान
परिवहन आयुक्त एवं विशिष्ट शासन सचिव ने 12 अक्टूबर 2021 को एक आदेश जारी कर 20 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2021 तक अवैध रूप से संचालित बाल-वाहिनी वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया गया था। इस दौरान डीटीओ ने अवैध वाहन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चलाना किए थे।
क्या गाइड लाइन की हो रही पालना
-स्कूल बस का रंग सुनहरी पीला होना के साथ बस पर आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
-बस, कैब, ऑटो के पीछे विद्यालय का नाम व फोन नंबर अनिवार्य रूप से अंकित होना चाहिए। जिससे आपात स्थिति में चालक की ओर से लारपरवाही करने पर सूचना दी जा सके।
-बस में ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस नंबर,मोबाइल नंबर,यातायात पुलिस व परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर,वाहन का पंजीयन क्रमांक कॉन्ट्रास्ट रंग में लिखा हुआ स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए।
-बस चालक के पास कम से कम पांच वर्ष का अनुभव हो और कम से कम पांच वर्ष पहले बना ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
-बाल वाहिनी में बैठने की क्षमता सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार डेढ़ गुणा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
-ऑटोरिक्शा में बच्चों की सुरक्षा के लिए बायीं और लोहे की जाली लगाई जाए।
-स्कूल बस में आपात स्थिति में छात्राओं के लिए अनिवार्य रूप से प्राथमिक सहायता बॉक्स और अग्निशमन यंत्र लगाए जाएं।
-चालक अनिवार्य रूप से नियमानुसार सीट बेल्ट लगाकर बस चलाएगा।
-ऑटों में ड्राइवर सीट पर बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा।
-बस में चालक के पास वाली सीट पर 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का परिवहन नहीं किया जाए।
-बाल वाहिनी वाहन चालक,परिचलाक खाकी वर्दी पहनेंगे।
-बाल वाहिनी का परिवहन विभाग का फिटनेस प्रमाण-पत्र होना चाहिए।
-स्कूल बस में जीपीएस और गति नियंत्रण के लिए स्पीड गवर्नर लगे होने चाहिए।
फैक्ट फाइल-
श्रीगंगानगर जिले में बाल-वाहिनी- 700
श्रीगंगानगर जिले में करीब 700 से अधिक बाल-वाहिनी हैं। इनकी फिटनेस और परमिट आदि की पहले भी जांच की थी। इसमें फिटनेस व परमिट नहीं होने पर चालान करने की कार्रवाई की थी। अब संघन अभियान चलाकर बाल-वाहिनी की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विनोद कुमार लेघा,जिला परिवहन अधिकारी,श्रीगंगानगर।
Published on:
28 Feb 2022 05:05 pm

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