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Exclusive: मंत्री के आदेश और बजट के बाद भी सीसीयू में नहीं डाली जा रही केबल

बजट की कमी नहीं है। चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने आदेश भी कर दिए है। इसके बावजूद जिला चिकित्सालय में आठ माह से सीसीयू में केबल नहीं डाली जा रही है।
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अजमेर

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Sonakshi Jain

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Updated: 18 Jul 2016, 5:20 PM IST

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श्रीगंगानगर.

बजट की कमी नहीं है। चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने आदेश भी कर दिए है। इसके बावजूद जिला चिकित्सालय में आठ माह से सीसीयू में केबल नहीं डाली जा रही है। एनएचएम के एक्सईएन का कहना है कि मंत्री के आदेश है लेकिन पीएमओ केबल डालने की अनुमति नहीं देतीं हैं। यदि अनुमति देती है तो आज से ही काम शुरू करवा दिया जाएगा।

पिछले आठ माह से पीएमओ, एनएचएम के अधिशासी अभियंता और ठेकेदार के बीच सीसीयू में बिजली केबल डालने का काम फुटबाल बना हुआ है। ठेकेदार ने कुछ माह पहले केबल का ऊपरी भाग से केबल डालना का कार्य शुरू किया था।

इस पर पीएमओ ने कहा कि केबल अंडरग्रांउड डाली जाए, इसको लेकर केबल डालने का काम बंद कर दिया गया। सीसीयू में केबल डालने के काम को कोई गंभीरता से लिया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा नुकसान इलाके के हृदय पीडि़त रोगियों को उठाना पड़ रहा है। हालांकि एनसीडी क्लीनिक की ओपीडी कुछ माह से चल रही है।

चिकित्सा मंत्री के आदेश

21 नंवबर 2015 को जिला चिकित्सालय की एमसीएचयू का शिलान्यास करने आई थे। इस दौरान पीएमओ को निर्देश दिए थे कि हृदय रोगियों के लिए एक करोड़ रुपए की लागत से बने कार्डियो केयर यूनिट (सीसीयू) वार्ड का शुभारंभ 21 दिन में राज्य मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी, विधायक राजेंद्र भादू और शिमला बावरी के हाथों से करवाया जाए।

नियुक्ति कहीं, काम कहीं

सीसीयू में एक फिजियोथैरिपिस्ट, दो नर्स, एक काउंसलर, दो इंक्वायरी ऑपरेटर और एक केयर कॉर्डिनेटर की नियुक्ति कर रखी है। इसमें जीएनएम-ग्रेड प्रथम दलीप गोदारा को प्रभारी लगा रखा है। सात दिसंबर को नर्स ग्रेड द्वितीय संतोष सिंह, कुलदीप राय, ताराचंद, हरप्रीत,नीरज और देवेंद्र शर्मा की सीसीयू में ड्यूटी लगा रखी है,लेकिन अधिकांश कार्मिक आपातकालीन कक्ष में काम कर रहे हैं। ताराचंद का यहां से चूरू में तबादला हो चुका है। इसमें एमडी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है,मगर फिजिशयन डॉ.पवन सैनी पांच दिन का प्रशिक्षण लेकर आए और इनको प्रभारी लगा रखा है।

नहीं मिल रहा उपचार

इसमें हाई ब्लड प्रेसर, स्ट्रोक (लकवा) हाइपरटेंशन तथा ब्लड शुगर सहित ह्दय रोगियों का उपचार की सुविधा मिलली थी। मगर चिकित्सालय में ब्लड प्रेसर, शुगर, लकवा तथा ह्दय रोगियों की संपूर्ण जांच के साथ भर्ती करने की व्यवस्था का प्रावधान कागजी बना हुआ है। यहां पर एक लैब भी बननी थी लेकिन कुछ नहीं हुआ।