श्रीगंगानगर. चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत उपचार करवाने के लिए मरीज राजकीय जिला चिकित्सालय के आर्थो और सर्जरी वार्ड में भर्ती हुए। उनका टीआईडी (टर्मिनल आइडेंटिफिकेशन नंबर) भी बना। लेकिन कुछ दिन भर्ती रह कर मरीज गायब हो गए। चिकित्सकीय शब्दावली में एबस्कोण्ड या लामा होना कहते हैं। हिन्दी भाषा में इसी मरीज का फरार होना या चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ अन्य हॉस्पिटल में चले जाना कहते हैं। मामला एक-दो मरीजों का होता तो इसे सामान्य मान लिया जाता। जिला कलक्टर सौरभ स्वामी के निर्देश पर जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने 2 दिसम्बर से 5 मार्च तक का रिकार्ड खंगाला तो आर्थो और सर्जरी वार्ड में भर्ती हुए 27 मरीजों के फरार होने या चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ अन्य हॉस्पिटल में जानकारी सामने आई। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का निजी अस्पताल में जाकर उपचार करवाना कई सवाल खड़े करता है। पहला तो यह है कि जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों ने बाद में निजी अस्पताल में उपचार करवाने में दिलचस्पी क्यों दिखाई? दूसरा यह है कि इसके पीछे किसी संगठित लपका गिरोह का तो हाथ नहीं। दूसरा सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिला चिकित्सालय छोड़ कर गए 27 मरीजों में से 16 मरीज एंजेल हॉस्पिटल में भर्ती हुए जो जिला अस्पताल से कुछ कदम की दूरी पर है।
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जब पीएमओ ने खंगाला रिकार्ड
जिला कलक्टर के निर्देश पर जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एस.कामरा ने जब रिकार्ड खंगाला तो पता चला कि मरीज जिन निजी अस्पतालों में गए वहां पर भी उनका नया टीआईडी (टर्मिनल आइडेंटिफिकेशन नंबर) बन गया और उनका उपचार चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के पैकेज अनुसार हो रहा है। जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती हुए 27 मरीज आखिर फरार या चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ निजी अस्पतालों में उपचार के लिए क्यों गए यह सवाल अभी तक अनुत्तरित है। इसके अलावा यह सवाल भी जवाब मांगता है कि 16 मरीजों को एंजेल हॉस्पिटल में ऐसी कौनसी सुविधा दिखी जो, वहां जाकर भर्ती हो गए।
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इन हॉस्पिटल ने भी उठाया फायदा
फरार हुए या चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ निजी अस्पतालों में जाकर उपचार करवाने वाले ज्यादातर मरीजों ने एंजेल हॉस्पिटल को ही चुना। इसके अलावा डॉ. एस.एस. टांटिया एमसीएच रिसर्च सेन्टर, डॉ. सेतिया बोन एंड जोइंट हॉस्पिटल, राजोतिया हॉस्पिटल, श्रीबालाजी हॉस्पिटल, गौरी हॉस्पिटल, डॉ. दीपक चौधरी हॉस्पिटल व एसएन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एक-एक मरीज तथा पीएमजी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल व आकाश दीप हॉस्पिटल में दो-दो मरीज जिला चिकित्सालय से कथित रूप से फरार होकर या बिना चिकित्सकीय सलाह उपचार के लिए ले गए।
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अब कलक्टर ने मांगी रिपोर्ट
चिरंजीवी योजना को लेकर संदेह के घेरे में आए ऐंजल हॉस्पिटल पर प्रशासन शिकंजा कसने के मूड में है। जिला कलक्टर ने इस हॉस्पिटल की कारगुजारियों के बारे में राजकीय जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। चिरंजीवी योजना को लेकर राजकीय जिला चिकित्सालय ने गंभीरता से लिया। जिला कलक्टर ने राजकीय जिला चिकित्सालय में जनवरी और फरवरी माह के दौरान आर्थो एवं सर्जरी वार्ड में चिरंजीवी योजनांतर्गत उपचार के लिए भर्ती हुए मरीजों की सूची मांगी तो इस योजना को लग रहे पलीते का सच उजागर हो गया।
गायब रोगियों की सूची तैयार
जिला कलक्टर के आदेश पर जो सूची तैयार हुई उसमें 2 दिसम्बर 2022 से 5 मार्च 2023 तक भर्ती हुए 27 मरीजों का विवरण था। चिरंजीवी योजनांतर्गत उपचार के लिए भर्ती हुए यह मरीज या तो फरार हो गए या फिर चिकित्सकीय सलाह के बिना चले गए। भर्ती मरीजों का फरार होना और चिकित्सकीय सलाह के बिना चले जाना सामान्य बात है, लेकिन जब गहराई से जांच हुई तो यह जानकारी सामने आई कि यह मरीज शहर के ही निजी अस्पतालों में जाकर भर्ती हो गए। ऐंजल हॉस्पिटल संदेह के घेरे में इसलिए आया कि 27 में से 16 मरीज इसी हॉस्पिटल में जाकर भर्ती हुए। यह हॉस्पिटल जिला चिकित्सालय परिसर के सामने है।
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कलक्टर बोले, अब होगा एक्शन
इस बीच, जिला कलक्टर सौरभ स्वामी ने बताया कि राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती 27 मरीजों में से 16 मरीजों का ऐंजल हॉस्पिटल में जाकर भर्ती होना इस हॉस्पिटल को संदेह के घेरे में लाता है। इसके हर पहलू की जांच होगी। अभी राजकीय जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी से कई बिन्दुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद इस हॉस्पिटल के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी ।