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कोरोना निगल गया रावण के पुतलों की कमाई, बनाने वाले एक दर्जन परिवारों को मार गई महंगाई

- एक सीजन में बना लेते थे 8 से 10 रावण के पुतले

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कोरोना निगल गया रावण के पुतलों की कमाई, बनाने वाले एक दर्जन परिवारों को मार गई महंगाई

कोरोना निगल गया रावण के पुतलों की कमाई, बनाने वाले एक दर्जन परिवारों को मार गई महंगाई

श्रीगंगानगर. दशहरे पर रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले तैयार कर अपना जीवनयापन करने वाले करीब एक दर्जन से अधिक लोग कोरोना काल में काम बंद होने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इसबार इन परिवारों को रावण के पुतलों से अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन रोक के बाद उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। इसबार उनको यहां पुतले बनाने को बुलाया गया और पुतले तैयार हुए तो रोक लग गई।


हनुमानगढ़ जंक्शन निवासी कुंदनलाल अरोडा का परिवार पिछले 45 साल से रावण व अन्य पुतले बनाने का कार्य कर रहे हैं। जो एक सीजन में दो से तीन लाख रुपए कमा लेते थे लेकिन कोराना काल में दो सीजन से इनकी कमाई पर ग्रहण लग गया है। इसके चलते अब वे चाट की रेहडी लगाकर अपना गुजारा करते हैं। उनके साथ करीब पंद्रह लोगों का भी रोजगार छिन गया।

कुंदनलाल बताते हैं कि वे 45 साल में करीब तीन सौ से अधिक रावण के पुतले बना चुके हैं। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर सहित पंजाब के कुछ शहरों में पुतले बनाते थे। एक सीजन में करीब आठ-दस पुतले बना देते थे। पुतले बनाने का खर्चा वे खुद लगाते हैं और पटाखे लगाने का खर्चा बनवाने वाले का होता है। अब उन्होंने श्रीगंगानगर में तीन पुतले बनाने का ठेका लिया था और पुतले 85 प्रतिशत तक बनकर तैयार हो गए थे लेकिन अचानक रोक लग गई। अब उनको लागत व मजदूरी ही मिलने की उम्मीद है। रावण के पुतले बनाने से करीब पंद्रह परिवारों की रोजी रोटी चलती थी लेकिन अब यह काम बंद हो गया है।


पुतले बनाने के एक्सपर्ट कुंदनलाल अरोड़ा बताते हैं कि करीब 45 साल पहले यहां डबवाली हरियाणा से एक उस्ताद रावण के पुतले बनाने आते थे, जिससे उन्होंने पुतले बनाना सीखा था। उस्ताद के जाने के बाद वे ही इलाके में पुतले बनाने का काम कर रहे थे। पहले वे टेलर का कार्य करते थे। अब यहां ही नहीं वरन सभी जगह रावण के पुतले बनाने वालों के सामने रोजी रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है।

दो सीजन तो ऐसे ही निकल गए लेकिन आने वाले समय का भी कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि अब वे वृद्ध हो चुके हैं। इसलिए अपने बेटे राकेश को पुतले बनाने के काम पर लगाया हुआ है। वहीं उनके परिवार के भी कुछ लोग इस कार्य को करते हैं। यदि आगे भी ऐसा ही चलता रहा तो वे पुतले बनाने का काम छोडकऱ कोई दूसरा काम तलाश करेंगे। अब वे जाकर रेहडी लगाएंगे, जिससे उनके परिवार का खर्चा चलता रहे।


उनका कहना है कि सरकार की ओर से लगाई गई पटाखों, रावण के पुतले जलाने सहित अन्य रोक से हजारों गरीब लोगों के रोजगार पर असर आया है। इससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पहले कोरोना की मार से ही वे उबर नहीं पाए हैं। लेकिन अब फिर से पाबंदियों के चलते कई रोजगार प्रभावित हुए हैं।

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