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कोलकाता से मंगाई जा रही है काली मिट्टी की इकोफे्रण्डली गणेश प्रतिमाएं

- यहां भी अब तरीका बदला, मिट्टी व पीओपी मिलाकर बना रहे

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कोलकाता से मंगाई जा रही है काली मिट्टी की इकोफे्रण्डली गणेश प्रतिमाएं

कोलकाता से मंगाई जा रही है काली मिट्टी की इकोफे्रण्डली गणेश प्रतिमाएं

श्रीगंगानगर. चतुर्थी पर घरों व पांडालों में लगाने के लिए अब ईकोफे्रण्डली प्रतिमाएं कोलकाता से मंगाई गई। यहां काली मिट्टी से प्रतिमाएं बनाई जाती है। इससे विसर्जन के बाद पानी प्रदूषित नहीं होता है। इसके अलावा जो लोग पहले पीओपी से प्रतिमाएं बनाते थे, उन्होंने भी अपना तरीका बदल लिया है।

इन निर्माताओं की ओर से भी अब मिट्टी व पीओपी मिक्स करके प्रतिमाएं तैयार की जा रही है। मिट्टी की प्रतिमाएं कोलकाता से आती है, यहां पिछले कई सालों से मिट्टी की प्रतिमाएं मंगाई जा रही है। धीरे-धीरे मिट्टी की गणेश व देवी प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। लोगों ने इस गणेश चतुर्थी को लेकर प्रतिमाएं बुक करानी शुरू कर दी है।


मिट्टी की प्रतिमाएं मंगाते हैं
- शहर में हनुमानगढ़ रोड पर पूजा कॉलोनी के समीप प्रतिमा विक्रेता अनिल कुमार ने बताया कि वे कोलकाता में निर्मित काली मिट्टी की प्रतिमाएं मंगवाते हैं। जो शहर व आसपास के एरिया में भेजी जाती है। लोगों ने प्रतिमाएं बुक कराना शुरू कर दिया है। प्रतिदिन दो-तीन प्रतिमाएं बुक हो रही है। रविवार से इसमें तेजी आने की उम्मीद है। मिट्टी की प्रतिमाएं हर साइज में उपलब्ध है।


मिट्टी व पीओपी मिक्स प्रतिमाएं
- हनुमानगढ़ पर जोधपुर से यहां आकर प्रतिमाएं तैयार करने वाले जस्सा का कहना है कि पहले वे केवल पीओपी की प्रतिमाएं बनाते थे लेकिन अब पीओपी व चिकनी मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। जस्सा का कहना है कि शुद्ध मिट्टी की प्रतिमाएं सूखने के बाद फटने लगती है, इसलिए उनमें कुछ पीओपी भी मिलाया जाता है। यहां होली के बाद से ही प्रतिमाओं का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है।


मिट्टी के गणेशजी लें और पर्यावरण बचाएं
- विशेषज्ञों का कहना है कि पीओपी पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, इसलिए पीओपी से बने गणेशजी की प्रतिमा के बजाय मिट्टी से बने गणेशजी लेकर आने चाहिए। जिससे विसर्जन के बाद पानी प्रदूषित नहीं हो।


घर में करें विसर्जन
- गणेशजी की प्रतिमाओं का लोग विसर्जन अपने घर में ही करें। नहर व नदी व तालाबों में विजर्सन से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इनमें लगे कलर आदि से पानी भी प्रदूषित होता है। इसलिए लोग अपने घरों में ही विसर्जन करें। इसके अलावा विसर्जन के लिए मोहल्लों, कॉलोनी या किसी खुले स्थान पर अलग से पानी का कुण्ड बनाकर उसमें प्रतिमाओं को विसर्जन किया जा सकता है।

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