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तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों की उमीदें फिर से धूमिल

-85 हजार से अधिक शिक्षकों को अब भी अपने गृह जिले में तबादले का इंतजार

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  • श्रीगंगानगर.राजस्थान में कार्यरत 85 हजार से अधिक तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए खुशखबरी की कोई उमीद नहीं है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग से आदेश जारी करवाए कि राज्य के अन्य विभागों में तबादले एक जनवरी से 10 जनवरी तक किए जाएंगे, लेकिन शिक्षा विभाग के शिक्षकों को अभी और इंतजार करना होगा। लंबे समय से अपने गृह जिले में स्थानांतरित होने की आशा लगाए बैठे इन शिक्षकों की उमीदें धूमिल हो रही हैं। इसमें श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ जिले के बड़ी संया में शिक्षक शामिल हैं।

करीब 85 हजार शिक्षकों ने ऑनलाइन किया था आवेदन

  • अगस्त 2021 में राज्य सरकार ने शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से तृतीय श्रेणी शिक्षकों से तबादला के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इस प्रक्रिया में राजस्थान के करीब 85 हजार शिक्षकों ने अपने गृह जिले में तबादले के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक तबादलों के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस बीच, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के तबादलों पर लगातार कार्रवाई जारी रही, जिससे तृतीय श्रेणी शिक्षकों के प्रति सरकारी रवैये में भेदभाव साफ नजर आता है।

तृतीय श्रेणी शिक्षकों का 2018 में हुआ था तबादला

  • 2018 में ही तृतीय श्रेणी शिक्षकों का आखिरी बार तबादला हुआ था। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहले भी कई बार औपचारिक कमेटियां बनाई हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इन कमेटियों का कार्यान्वयन केवल कागजों तक ही सीमित रहा है। 1994 से अब तक कई बार शिक्षकों की तबादला नीति पर कमेटियां बनीं, लेकिन उनकी सिफारिशें कभी लागू नहीं हो पाईं।

कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए

  • राज्य में बदलाव के बावजूद तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई शिक्षकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में नीतियों को बनाने में समय बर्बाद किया गया है और मौजूदा सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। शिक्षकों को केवल आश्वासन मिलते हैं, जबकि वास्तविकता में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

वादा किया था,लेकिन वादों का क्या

  • अब सवाल यह है कि क्या सरकार अपने वादों को पूरा कर पाएगी या शिक्षकों को इसी तरह इंतजार करना पड़ेगा? आने वाले समय में शिक्षकों को सही समाधान मिले, यही उमीद की जा सकती है। राज्य सरकार ने प्राचार्य, व्यायाता और वरिष्ठ अध्यापकों के लिए बंपर तबादले किए। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के हितों की अनदेखी की गई है। अगर हालात इसी तरह बने रहे तो तृतीय श्रेणी शिक्षकों की कर्मठता और मनोबल दोनों प्रभावित होंगे।
  • -हंसराज सहारण, जिला महामंत्री, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षा संघ।