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श्रीगंगानगर में दो लाख लीटर दूध की आपूर्ति ठप

- किसानों के नाकों पर बिकने वाले दूध से नहीं हो रही मांग पूरी

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- अधिक तापमान के कारण दूध की गुणवत्ता हो रही प्रभावित

श्रीगंगानगर.

किसान संगठनों के आंदोलन के कारण दूधियों के माध्यम से शहर में घर-घर दूध की आपूर्ति व्यवस्था ठप होने से दूध का संकट खड़ा हो गया है। डेयरियों के पॉली पैक दूध की भी आपूर्ति नहीं होने से साढ़े तीन लाख से अधिक आबादी वाले जिला मुख्यालय पर आंदोलन के दूसरे दिन शनिवार को दूध का संकट दिखाई देने लगा है। प्रशासन के असहयोगी रवैये और पुलिस के तमाशबीन की भूमिका में रहने से सहकारी क्षेत्र की डेयरियों ने दूध की आपूर्ति से हाथ खींच लिए हैं। आगामी दिनों में यही स्थिति रही तो बच्चे और मरीज दूध को तरस जाएंगे।

दूध यूनियन के अध्यक्ष सुभाष स्वामी के अनुसार साइकिल, मोटरसाइकिल और चौपहिया वाहनों से यह दूधिये रोजाना दो लाख लीटर दूध की आपूर्ति शहर में करते हैं। डेयरियों का पॉली पैक दूध इससे अलग है। इस दूध की आपूर्ति तो बिलकुल ठप हो चुकी है। स्वामी ने बताया कि दूधिये अपने दूध की बिक्री शहर को आने वाले मार्गों पर किसानों की ओर से बनाए गए नाकों पर कर रहे हैं। लेकिन उनकी संख्या कम ही है।

फट रहा है दूध

किसानों के नाकों पर बिकने वाले दूध के फटने की शिकायत आम है। दूधिये इन नाकों पर टंकियों में भरकर दूध लाते हैं और बिक्री करते हैं। दूध की बिक्री सात बजे तक ही होती है। उसके बाद दूधियों का काम ठंडा पड़ जाता है और अत्यधिक तापमान के कारण दूध की गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।

यह दूध घर पर लाकर उबालते समय फट जाता है। दूधिये भी इस व्यवस्था से खुश नहीं। उनका कहना है कि वह पचास किलो दूध लेकर आते हैं तो उसमें से 15-20 किलो बच जाता है। दूध खरीदने के लिए नाकों के आसपास आबाद कॉलोनियों के लोग ही आते हैं। जिनके मकान नाकों से आठ-दस किलोमीटर दूर है वह डिब्बा बंद दूध का उपयोग कर काम चला रहे हैं। दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति नहीं होने से शहर में सरस डेयरी के बूथों पर ताले लटक गए हैं।

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