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बीटी कॉटन को गुलाबी सुंडी ने किया तहस-नहस, कृषि विभाग कार्यशाला के नाम पर कर रहा खानापूर्ति

बेमौसम की बारिश,गुलाबी सुंडी से कॉटन का उत्पादन व गुणवत्ता बहुत ही कमजोर रहीबीटी कपास में गुलाबी सुंडी प्रबंधन पर जिला स्तरीय कार्यशाला

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बीटी कॉटन को गुलाबी सुंडी ने किया तहस-नहस, कृषि विभाग कार्यशाला के नाम पर कर रहा खानापूर्ति

बीटी कॉटन को गुलाबी सुंडी ने किया तहस-नहस, कृषि विभाग कार्यशाला के नाम पर कर रहा खानापूर्ति

बीटी कॉटन को गुलाबी सुंडी ने किया तहस-नहस, कृषि विभाग कार्यशाला के नाम पर कर रहा खानापूर्ति
बेमौसम की बारिश,गुलाबी सुंडी से कॉटन का उत्पादन व गुणवत्ता बहुत ही कमजोर रही
बीटी कपास में गुलाबी सुंडी प्रबंधन पर जिला स्तरीय कार्यशाला
श्रीगंगानगर. इस बार इलाके में गुलाबी सुंडी,बेमौसम की बारिश और चक्रवाती तूफान से कॉटन की फसल में 20 से 90 प्रतिशत तक श्रीगंगानगर-अनूपगढ़ और हनुमानगढ़ जिले में नुकसान हुआ है। वहीं,औसत नुकसान 66 प्रतिशत से अधिक माना गया है। बीटी कॉटन की फसल को इस बार गुलाबी सुंडी ने तहस-नहस कर दिया। इस कारण 637 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस कारण कॉटन का उत्पादन प्रति हैक्टेयर आठ से 10 ङ्क्षक्वटल तक ही हुआ। कॉटन के कम उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी कमजोर रही। इसके चलते किसानों को कॉटन का औसत भाव 5500 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल मिल रहा है। पिछले दो वर्ष की तुलना करने पर करीब तीन हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल भाव कम मिल रहा है। अब कृषि विभाग गुलाबी सुंडी के प्रबंधन को लेकर कार्याशाला कर खानापूर्ति कर रहा है।
गुलाबी सुंडी के प्रभावी प्रबन्धन
पर फोकस
इस कड़ी में गुलाबी सुंडी नियंत्रण विषय पर शनिवार को जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन कृषि अनुसंधान केन्द्र श्रीगंगानगर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. जी. आर. मटोरिया ने किया है। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि सी. आई. सी. आर. सिरसा के क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य वैज्ञानिक एवं डायरेक्टर डॉ.ऋषि कुमार थे। कार्यशाला में जिले के समस्त सहायक निदेशक कृषि,कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी,कृषि पर्यवेक्षक तथा प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे। सहायक निदेशक कृषि श्रीगंगानगर सुशील कुमार शर्मा ने कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया। इस मौके पर डॉ.मटोरिया ने बताया की गुलाबी सुंडी के प्रभावी प्रबन्धन के लिए किसान भाई बनछटियों को खेत के आस-पास एकत्रित नहीं करें तथा भंडारित कपास को ढक कर रखे,जिससे गुलाबी सुंडी के पतंगे खेतों में फसल पर अंडे नहीं दे पाएंगे। डॉ. मटोरिया ने कहा कि 21 फरवरी से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर गुलाबी सुंडी के नियत्रंण व प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
कृषकों की शंंकाओं का समाधान किया
कृषकों की कार्यशाला को जोनल डायरेक्टर रिसर्च डॉ.बी.एस.मीणा, सहायक प्राध्यापक (पौध-व्याधि) डॉ. प्रदीप, सहायक प्राध्यापक (शस्य) डॉ. रघुवीर ङ्क्षसह मीणा ने भी संबोधित किया। कार्यशाला में उपस्थित प्रगतिशील कृषकों ने गुलाबी सुंडी के संबंध में प्रश्न पूछकर अपनी शंका जाहिर की तथा डॉ.ऋषि कुमार ने कृषकों की शंकाओं का समाधान किया। अन्त में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) अनूपगढ़ डॉ.रमेश चन्द्र बराला ने आगन्तुकों का आभार प्रकट किया।
4.38 हेक्टेयर में थी कॉटन की फसल
कृषि विभाग के अनुसार तीनों जिलों में आइजीएनपी, भाखड़ा व गंगनहर में नहरबंदी के बावजूद कॉटन की बुवाई 4 लाख 38 हजार 307 हैक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले वर्ष 3 लाख 62 हजार 908 हैक्टेयर में कॉटन की बुवाई हुई थी। इस बार 21.26 लाख ङ्क्षक्वटल कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान था। गुलाबी सुंडी की वजह से 12.75 लाख ङ्क्षक्वटल कॉटन का उत्पादन कम हुआ। इस कारण किसानों को 637 करोड़ रुपए का राजस्व का नुकसान हुआ।
कॉटन का बीज ही गुणवत्ताहीन, कृषि विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
भारतीय किसान संघ श्रीगंगानगर इकाई के तहसील संगठन मंत्री व गांव 18 एमएल के किसान रामलाल ने कहा कि इस बार बीटी कॉटन की फसल ने किसानों को दगा दिया। बीटी कॉटन की बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीज की गुणवत्ता ही खराब है। इस पर किसी का नियंत्रण तक नहीं है। कृषि विभाग कोई कार्रवाई कर नहीं रहा है। इस कारण किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इस कारण किसानों को कॉटन की फसल की बुवाई के लिए खाद-बीज और चुगाई का खर्चा ही नहीं निकल पा रहा। किसानों का कहना है कि कॉटन की फसल ने इस बार दगा ही दिया है। इसकी केंद्रीय कृषि मंत्री तक शिकायत की है।
कम ऊंचाई वाली किस्मों की बुवाई कीजिए


डॉ. ऋषि कुमार ने गुलाबी सुंडी के जीवन चक्र तथा प्रबंधन एवं नियंत्रण पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बी.टी.कपास की बीज दर 450 ग्राम प्रति बीघा रखें एवं बुवाई कतार से कतार की दूरी 108 से.मी. एवं पौधे से पौधे की दूरी 60 से.मी. रखें। राज्य सरकार की ओर से अनुमोदित किस्मों की ही बुवाई करें। अज्ञात स्त्रोत से प्राप्त किसी भी किस्म की बुवाई नहीं करें। कीट के प्रकोप से बचाव के लिए खेत में रखी छटिट््यों को झाडकऱ अधपके ङ्क्षटडों को इक_ा कर नष्ट करते हुए छट्टियों को खेत से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें। उन्होंने बताया कि कम उंचाई वाली व कम अवधि में पकने वाली किस्मों की बुवाई करें तथा 45 से 60 दिवस की अवधि में नीम आधारित कीटनाशी का छिडक़ाव व मिश्रित कीटनाशकों की अपेक्षा एकल कीटनाशी का पैकेज ऑफ प्रेक्टिसेस के अनुसार छिडक़ाव करें।

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