scriptगुलाबी सुंडी: कपास पट्टी के किसानों ने कपास से बनाई दूरी | Patrika News
श्री गंगानगर

गुलाबी सुंडी: कपास पट्टी के किसानों ने कपास से बनाई दूरी

-पिछले साल के मुकाबले कॉटन की बुवाई काफी कम
-पत्रिका एक्सक्लूसिव-कृष्ण चौहान

श्री गंगानगरJun 12, 2024 / 01:15 pm

Krishan chauhan

  • श्रीगंगानगर.दूध का जला छाछ को फूंक-फूंक कर पीता है। यह कहावत कपास पट्टी के नाम से मशहूर श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले के किसानों पर सटीक बैठ रही है। पिछले साल गुलाबी सुंडी के प्रकोप व अंधड़ से कॉटन की फसल में 90 प्रतिशत तक खराबा होने से किसानों को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा। नजीता यह रहा इस बार किसानों ने कॉटन से दूरी बना ली। इसको कॉटन के बुवाई रकबे में आई कमी से समझा जा सकता है। श्रीगंगानगर खंड में इस वर्ष कॉटन की बुवाई 2,42,974 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुई है,जबकि पिछले वर्ष कॉटन की बुवाई 4,20,540 हेक्टेयर में हुई थी।

बुवाई कम से पड़ेगा यह असर

  • -राजस्थान में कपास उत्पादक जिला श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ है तथा यहां पर राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक कपास का उत्पादन होता है।
  • -अजमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, सुमेरपुर आदि जगह कपास का उपयोग सूती कपड़ा बनाने के लिए किया जाता है।राजस्थान से कपास का निर्यात भी किया जाता है।

कॉटन फसल से किसानों की दूरी क्यों?

  • पिछले वर्ष गुलाबी सुंडी की वजह 20 से 90 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हुई।
  • पिछले वर्ष कॉटन की गुणवत्ता खराब होने से सीसीआई ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में खानापूर्ति की। पिछले कुछ वर्षों से कॉटन का भाव भी बहुत कम चल रहा है।
  • देशी, अमरीकन कॉटन व बीटी कॉटन एक नकदी फसल है जबकि इसका कोई अच्छा विकल्प नहीं है। कम बुवाई से किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
  • फैक्ट्रियों में काम करने वाली बाहर से आने वाली लैबर का रोजगार प्रभावित होगा।
  • कॉटन की चुगाई करने वाला श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट आएगा।
  • श्रीगंगानगर,अनूपगढ़ व हनुमानगढ़ जिले की कॉटन जिनिंग व प्रेसिंग फैक्ट्रियों में कॉटन की गांठे बनकर भीलवाड़ा व अन्य राज्यों में बाहर जाता है, वहां पर कपड़ा बनता है। वह गांठें कम जाएंगी।
  • देशी कपास सर्जिकल कॉटन के काम में ली जाती है, उस पर भी असर पड़ेगा।
  • बीटी कॉटन की बुवाई कम होने पर श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ व हनुमानगढ़ जिले की कॉटन जिनिंग व प्रेसिंग फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से नहीं चल पाएगी, काम-धंधा भी प्रभावित होगा।

श्रीगंगानगर जिले में कॉटन की बुवाई का गणित

  • देशी कॉटन की बुवाई:1181
  • अमेरिकन कॉटन की बुवाई:1736
  • बीटी कॉटन की बुवाई:80,730
  • कुल कॉटन की बुवाई:83,647

अनूपगढ़ जिले में कॉटन की बुवाई का गणित

  • देशी कॉटन की बुवाई:2842
  • अमेरिकन कॉटन की बुवाई:888
  • बीटी कॉटन की बुवाई:54,412
  • कुल कॉटन की बुवाई:58,142

श्रीगंगानगर खंड में कॉटन की बुवाई

  • श्रीगंगानगर खंड में पिछले वर्ष कॉटन की बुवाई:4,20,540 हेक्टेयर
  • श्रीगंगानगर खंड में इस बार कम हुई कॉटन की बुवाई:1,77,566 हेक्टेयर

पिछले तीन वर्ष में यूं बढ़ा कॉटन का रकबा

  • वर्ष बुवाई हेक्टेयर
  • 2021-22 3,04564
  • 2022-23 3,62,909
  • 2023-24 4,20,540

पौने दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई कम हुई

  • पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ व हनुमानगढ़ जिले में देसी, अमरीकन व बीटी काटन की बुवाई पौने दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में कम हुई है।
  • -डॉ.सतीश कुमार शर्मा, अतिरिक्त संयुक्त निदेशक, (कृषि),श्रीगंगानगर खंड।

Hindi News/ Sri Ganganagar / गुलाबी सुंडी: कपास पट्टी के किसानों ने कपास से बनाई दूरी

ट्रेंडिंग वीडियो