
कंवर सेन लिफ्ट नहर के लिफ्टों के रखरखाव का काम निजी हाथों में सौंपने की तैयारी
-सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर बिजली बचाने की कोशिश
इंदिरा गांधी मुख्य नहर की 243आरडी के बिरधवाल हेड से निकलने 550 क्यूसेक वाली,152 किमी किलोमीटर लंबी और राजस्थान की प्रमुख लिफ्ट नहरों में सुमार होने वाली कंवर सेन लिफ्ट नहर को सरकार अब इसे निजी हाथ में सौंपने की तैयारी कर चुकी है और इसके टेंडर जारी हो गए। जानकारी के अनुसार इन चारों पंपिंग स्टेशनों को सौर ऊर्जा के भारी प्लांट लगाकर बिजली उत्पन्न करके चलाने की योजना है। टेंडर में भी यह प्रमुख शर्त रखी गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 24 जून 2014 को मंत्रियों व विभाग के आला अधिकारियों के साथ इस नहर का दौरा किया था उस समय इन पंपिंग स्टेशनों पर होने वाले अधिक बिजली खर्च को लेकर नहर पर चर्चा हुई थी जिसके बाद से इन पंपिंग स्टेशनों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के प्रयास चल रहे थे।
जानकारी के अनुसार तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी, अत्यधिक विद्युत खर्च और विद्युत कटौती के चलते इसे निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। इस लिफ्ट नहर से गंगानगर जिले के टिब्बा क्षेत्र व बीकानेर जिले के हजारों गांवों तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए चार पंपिंग लिफ्टों की सहायता से 187 फुट पानी उठाकर पेयजल के लिए पानी पहुंचाया गया है ।
इस नहर से राजियासर पंपिंग स्टेशन से 58 फुट, मलकीसर पंपिंग स्टेशन से 19 फुट,खारा पंपिंग स्टेशन से 48 फुट तथा हुसंगसर पंपिंग स्टेशन से 62 फुट पानी उठाया गया है साथ ही इस नहर से बीस माइनरों और 51 सीधे मोघो से हजारों हैक्टर कृषि भूमि की सिंचाई होती।
-चारों पंपिंग स्टेशनों का यह है विद्युत खर्च।
1.प्रथम- राजियासर पंपिंग स्टेशन- अनुमानित खर्च प्रतिमाह दो करोड़ पचास लाख(2.50)
2. द्वितीय- मलकीसर पंपिंग स्टेशन -अनुमानित खर्च प्रतिमाह 55 लाख रुपए
3. तृतीय- खारा पंपिंग स्टेशन-अनुमानित खर्च प्रतिमाह 45 लाख
4. चतुर्थ -हुसंगसर पंपिंग स्टेशन अनुमानित खर्च प्रतिमाह 50 लाख
-कर्मचारियों की कमी भी है भारी समस्या
चारों पंपिंग स्टेशनों पर विद्युतकार, फीडर व मैकेनिकल जैसे मुख्य पद खाली पड़े हैं। इससे बिजली की समस्या का समाधान नहीं हो पाता है। पुरानी विद्युत मोटरों की बाहर से मरम्मत करानी पड़ती है जिसका बहुत अधिक खर्च आता है। जानकारी के अनुसार इस नहर की चारों पंपिंग स्टेशनों पर लगभग सौ पद स्वीकृत हैं जबकि वर्तमान में आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं।
इसके अलावा राजियासर के प्रथम पंपिंग स्टेशन पंपिंग जेईएन रामकुमार कुमावत ने बताया कि बिजली के बार बार कट लगने से मोटरों को रुक रुक कर दुबारा चलाना पड़ता है आगे की तीनों पंपिंग स्टेशन इससे प्रभावित होते हैं। साथ ही पानी का बहाव कम हो जाता है इससे किसानों को बड़ा नुकसान होता है। वे सिंचाई पानी से वंचित हो जाते हैं। जेईएन ने बताया कि केवल जुलाई माह में अब तक सात बार कट लग चुके हैं।
Published on:
08 Jul 2019 08:22 pm

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