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श्रीगंगानगर. इलाके में मच्छरों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद राजकीय चिकित्सालयों में मलेरिया के रोगियों की संख्या में कमी आई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त आंकड़े तो कुछ एेसी ही कहानी बयान करते हैं। इन आंकड़ों को देखें तो वर्ष २०१४ में जहां ५२५ मलेरिया रोगी चिकित्सालयों में पहुंचे वहीं २०१७ में इनकी संख्या महज ८५ ही रह गई । एेसा नहीं है कि इलाके में मलेरिया के रोगी ही नहीं है अपितु अधिकांश रोगी निजी चिकित्सालयों में उपचार करवा लेते हैं, एेसे में उनका आंकड़ा भी स्पष्ट नहीं हो पाता है।
स्लाइड से कम में हुई पुष्टि
खास बात यह है कि राजकीय चिकित्सालयों में जितने लोगों के स्लाइड टैस्ट हुए उनमें से मलेरिया की पुष्टि काफी कम में हुई। वर्षवार आंकड़ों के अनुसार देखें तो वर्ष २०१७ में दिसम्बर तक ही २०३८६४ लोगों के स्लाइड टैस्ट किए गए। इनमें से पुष्टि केवल ८५ में हुई। इनमें ८२ मलेरिया पीवी और तीन मलेरिया पीएफ के रोगी थे। इसी प्रकार वर्ष २०१४ में २१३९५५ रोगियों की स्लाइड जांच में से ५२५, वर्ष २०१५ में २३४७६२ स्लाइड में से३२२ में तथा वर्ष २०१६ में २२१५८९ स्लाइड टैस्ट में से २३९ में ही मलेरिया की पुष्टि हो पाई है।
हमारे यहां घटे हैं रोगी
यदि आंकड़ों की बात करें तो राजकीय चिकित्सालयों में मलेरिया के रोगी लगातार घटे हैं। वर्ष २०१७ के दिसम्बर तक महज ८५ रोगियों में ही मलेरिया की पुष्टि हुई जबकि २०१४ में यह आंकड़ा ५२५ था। वर्ष २०१८ में अब तक ३२७४ स्लाइड टैस्ट हुए हैं। इनमें से अब तक महज दो मलेरिया पीवी के रोगी मिले हैं। डॉ.अजय सिंगला, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्रीगंगानगर
Published on:
25 Apr 2018 04:04 pm
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