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-नगर परिषद सभापति का दावा, ग्राम पंचायतों में खुले नंदीशाला तभी स्थायी समाधान
श्रीगंगानगर.
नगर परिषद प्रशासन हर साल करीब दो हजार आवारा पशुओं के हरे चारे और उनके रहने पर लगभग दो करोड़ रुपए सालाना बजट खर्च कर रही है। इसके बावजूद शहर को कैटल फ्री सिटी का सपना साकार नहीं हो रहा है। परिषद ने अपनी ओर से मिर्जेवाला रोड स्थित नंदीशाला में 700 से 750 आवारा पशुओ की व्यवस्था संभाल रही है। वहीं सुखाडिय़ा सर्किल श्रीगोशाला में करीब 250 आवारा पशु और नरसिंहपुरा स्थित गौशाला में 1100 पशुओं को रखवाया गया है, तीस रुपए प्रति पशु के हिसाब से हरे चारे के लिए व्यवस्था करवाई जा रही है।
इस हिसाब से करीब दो करोड़ का बजट हर साल चुका रही है लेकिन शहर में घूम रहे आवारा पशुओं से निजात नहीं मिली है। लंबे समय से शहर की इस समस्या के संबंध में नगर परिषद सभापति अजय चांडक का कहना है कि कोर्ट की फटकार और जिला प्रशासन की हर माह होने वाली बैठकों में बार बार यही मुद़दा हावी रहता है। लेकिन इसका स्थायी समाधान ढूंढने का प्रयास तक नहीं किया है। सभापति का दावा है कि जब तक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर नंदीशाला नहीं बनेगी तब तक आवारा पशुओं का पलायन शहर में आने से रूकेगा नहीं। परिषद ने अपने स्तर पर अब तक करीब दो हजार पशुओं को पकड़कर दो गौशाला और एक नंदीशाला में रखवाए गए थे ताकि शहर कैटल फ्री सिटी हो सके। इसके बावजूद वर्तमान में शहर में आवारा पशुओं को घूम देखा जा सकता है।
अब आगे क्या, निजात मिलेगी या नहीं
सभापति का कहना था कि राज्य सरकार ने आवारा पशुओं के लिए बजट देने का आश्वासन दिया था लेकिन पिछले चार सालों में एक भी रूपया का बजट नहीं मिला है। आवारा पशुओं को पकड़कर कहां छोड़े या किसे सुपुर्द करें, यह समस्या बार बार गौशाला प्रबंध समितियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई जा चुकी है। विधानसभा में यह मामला उठ चुका है लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया है। घोषणाएं हुई लेकिन धरातल पर क्रियान्वित नहीं हो पाया।
कोर्ट के आदेश पर साधी चुप्पी
जिला स्थायी लोक अदालत ने तीन महीने में कैटल फ्री सिटी का आदेश किया था। यहां तक कि हैल्पलाइन बनाकर वार्डो से आवारा पशुओं की धरपकड़ करने के लिए गाइडलाइन जारी की थी लेकिन समय अवधि बीतने के बाद भी नगर परिषद ने यह कदम नहीं उठाया है। परिवादी ने आदेश की पालना नहीं करने पर न्यायालय की अवमानना के संबंध में फिर से कोर्ट की शरण ली है। इस संबंध में सभापति ने यह मामला कोर्ट में विचाराधीन होने की बात कहकर चुप्पी साध ली।
Published on:
02 Jun 2018 10:17 pm

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