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सरहद पर रस्से की जिद: पौराणिक खेल रस्सा-कस्सी ने जोड़ा पीढिय़ों का हौसला

गांव 28 आरबी में गुरु गोविंद सिंह जयंती पर हुआ भव्य टूर्नामेंट,मेहनत, दमखम और एकजुटता की दिखी अनोखी मिसाल

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श्रीगंगानगर.भारत-पाक सीमा से सटे गांव 28 आरबी में दशम पिता श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती पर ग्रामीण आंचल के पौराणिक खेल रस्सा-कस्सी ने ऐसा रंग जमाया कि सरहद की ठंडी हवाएं भी खिलाडिय़ों के जोश के आगे फीकी पड़ गईं। मिट्टी से जुड़े इस पारंपरिक खेल ने न केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन कराया,बल्कि जिद, अनुशासन और टीम भावना की जीवंत तस्वीर भी पेश की।गांव के खुले मैदान में आयोजित इस भव्य टूर्नामेंट में क्षेत्र की कुल 13 टीमों ने भाग लिया। हर मुकाबला सांसें थाम देने वाला रहा। रस्से के दोनों छोर पर खड़े खिलाडिय़ों की आंखों में जीत की चमक,पैरों में जमी मिट्टी और हाथों में पसीने से भीगी रस्सी यह दृश्य ग्रामीण खेल संस्कृति की आत्मा को दर्शा रहा था। दर्शकों की तालियों और जयकारों के बीच गांव 3 आरबी की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गांव 36 बीबी (दूदा मौड़ां) को हराकर प्रतियोगिता अपने नाम की।

सीमा क्षेत्र के युवाओं को नशे से दूर रखने की पहल

विजेता टीम को 5100 रुपए नकद व शानदार ट्रॉफी, उपविजेता को 3100 रुपए नकद व ट्रॉफी प्रदान की गई। तीसरे स्थान पर 28 आरबी टीम और चौथे स्थान पर 28 आरबी की टीम रही, जिन्हें क्रमश: 2100 व 1100 रुपए नकद तथा ट्रॉफियों से सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान खिलाडिय़ों के चेहरों पर गर्व और संतोष साफ झलक रहा था।राज्यपाल अवॉर्डी पंजाबी शिक्षक लक्ष्मण भाटी ने बताया कि यह आयोजन केवल खेल तक सीमित नहीं था,बल्कि मेरा गांव नशा मुक्त गांव अभियान के तहत युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त संदेश भी था। खेलों से जुडकऱ सीमा क्षेत्र के युवाओं को नशे से दूर रखने की इस पहल की चारों ओर सराहना हुई।

मुकाबले दिखने के लिए गांव की माताएं-बहनें भी बड़ी संख्या में पहुंचीं

इस टूर्नामेंट की खास बात यह रही कि युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग खिलाडिय़ों और बच्चों ने भी पूरे उत्साह से भाग लिया। मुकाबले देखने के लिए गांव की माताएं-बहनें भी बड़ी संख्या में पहुंचीं,खासकर बच्चों के मैचों पर तालियों की गूंज ने माहौल को और जीवंत बना दिया।

सरहद पर भी उत्सव की रोशनी दूर तक चमकती है

आयोजन में गुरप्रीत सिंह (कनाडा), गुरप्रीत सिंह (इंग्लैंड), जकसीर सिंह (इंग्लैंड), पलविंदर सिंह (जर्मनी), जगसीर सिंह, शिक्षक रामचंद्र, गगनदीप सिंह, जगतार सिंह व गुरसेवक सिंह सहित कई युवाओं ने आर्थिक सहयोग दिया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों का भरोसा दिलाया। सभी मैचों की रोचक पंजाबी कमेंट्री मणी ढिल्लों ने की,जबकि निर्णायक की भूमिका लक्ष्मण भाटी ने निभाई।समूचे आयोजन में ग्रामवासियों की शानदार व्यवस्थाओं ने यह साबित कर दिया कि जब परंपरा,खेल और सामाजिक संदेश एक साथ आते हैं, तो सरहद पर भी उत्सव की रोशनी दूर तक चमकती है।