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संसाधनों की कमी का दंश झेलता उपखण्ड मुख्यालय का एकमात्र बालिका विद्यालय

थमा बालिकाओं का डॉक्टर बनने का सपना

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सोहन वर्मा
रायसिंहनगर. उपखण्ड मुख्यालय पर एकमात्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के कक्षा-कक्षों की टपकती छतें, धूल फांकते लैब उपकरण व कक्षा-कक्षों में झांकती दरारें विद्यालय की दुर्दशा की कहानी बयां कर रही है। अपने स्थापना काल से ही मूलभूत सुविधाओं एवं संसाधनों का अभाव झेल रहे इस विद्यालय पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी हो, ऐसी भी बात नहीं है। उपखण्ड स्तर पर परीक्षाओं का केन्द्र इसी बालिका विद्यालय में होता है। इसके बावजूद किसी भी अधिकारी की नजर इस विद्यालय की दयनीय स्थिति पर नहीं पड़ रही है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से बालिका शिक्षा को बढावा देने के दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
प्रधानाचार्या बबीता कालवा ने बताया कि इस स्कूल में कक्षा एक से बारह का संचालन किया जाता है। वर्तमान में इस स्कूल में 482 छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय में 35 कमरे बने हुए है लेकिन इनमें से दो दर्जन कमरों की हालात दयनीय है। शेष रहे कमरों में कार्यालय, स्मार्ट कक्ष, पुस्तकालय, लैब, प्रधानाचार्य कक्ष आदि निकाल दें तो कक्षाएं संचालित करने के लिए मात्र दस कमरे बचते हैं। इनमें बारह कक्षाओं का संचालन कर पाना मुश्किलभरा काम है। प्रधानाचार्या कालवा ने मात्र छह माह पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के पास उपलब्ध फंड से रंग रोगन करवाकर बाहरी दशा को सुधारने का बेहतर प्रयास किया है।
विषय अध्यापकों का अभाव
विद्यालय में विज्ञान व कला संकाय संचालित हो रही है। जिनमें इकोनोमिक्स, केमेस्ट्री के व्याख्याता के दो पद, अंग्रेजी, संस्कृत व हिन्दी के शिक्षकों के अलावा लैब सहायक के तीन पद लंबे समय से रिक्त हैं।
ईंटों के सहारे थमी प्रयोगशाला की छत, उपकरण बने कबाड़
बालिका विद्यालय में दो दर्जन से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हैं। लेकिन विज्ञान विषय में रसायन, बायो व केमेस्ट्री की तीनों लैब में पड़े उपकरण स्टाफ के भाव में धूल फांक रहे है। वहीं लैब का कक्ष गिरने के कगार पर है। इसकी छत ईंटों के सहारे रोकी हुई है। जो कभी भी गिर सकती है।
भामाशाह की दरकार
शहर के बीचोबीच स्थित विद्यालय को कभी संसाधनों का आभाव नहीं खलता था। लेकिन सरकार की मदद के इंतजार मे जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। समय रहते भामाशाह का सहयोग मिले तो इस विद्यालय की तकदीर बदल सकती है।
विद्यालय में संसाधनों के अभाव के चलते बालिकाओं की पढाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। भामाशाह से संपर्क कर सहयोग मांगा जा रहा है। ताकि विद्यालय की दशा को सुधारा जा सके। विद्यालय में रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिये विभाग को लिखा गया है।-बबीता कालवा, प्रधानाचार्य, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रायसिंहनगर