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गांव की मुख्य रोड पर शव रखकर प्रदर्शन करने की थी प्लानिंग, सख्ती पर बैकफुट पर आया परिवार

- पुलिस डिटेन में खखां गांव के बलदेव सिंह की मौत का मामला, परिजनों के कई सदस्यों पर तस्करी के केस भी है, ऐसे में उन्हें भी पकड़ने की आंशका पर पुलिस के ​खिलाफ प्रदर्शन का बनाया था इरादा.

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श्रीगंगानगर। हिन्दुमलकोट थाना क्षेत्र के गांव खखां निवासी बलदेव सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के तीसरे दिन अंतिम संस्कार किया गया। नशा तस्करी के संदेह में डीएसटी प्रथम की कार्रवाई के दौरान बलदेव सिंह ने तीन दिन पहले शु कथित तौर पर मादक पदार्थ निगल लिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान मौत हो गई। शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया था। घटना के बाद मृतक के पिता की रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज कर न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देशन में जांच शुरू की गई। करीब चार घंटे की बातचीत और समझाइश के बाद पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। ऐसे में परिजन शव को श्मशान घाट तक ले भी गए लेकिन पुलिस कार्रवाई की आशंका के चलते वापस घर ले आए, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया।

जांच के दायरे में



परिजनों ने इस शव को गांव की मुख्य रोड पर रखकर बड़े प्रदर्शन करने की तैयारी की थी लेकिन सूचना पुलिस तक पहुंच गई। शव के दाह संस्कार में देरी की सूचना पर सीओ ग्रामीण भूपेन्द्र सोनी हिन्दुमलकोट थाने पहुंचे और परिजनों से वार्ता की। सोनी ने बताया कि परिजन आशंकित थे कि दाह संस्कार के बाद परिवार के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि वे दो अलग-अलग प्रकरणों में जांच के दायरे में हैं।



शव को लेकर तैनात था पुलिस बल

सीओ ने स्पष्ट किया कि नए कानून के तहत शव अनावश्यक रूप से रोके रखने या उसकी दुर्गति करने का अधिकार किसी को नहीं है, आवश्यक होने पर पुलिस स्वयं दाह संस्कार की प्रक्रिया करवाएगी। इसके बाद परिजन राजी हो गए और अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से कराई जा रही है। उधर, पुलिस प्रशासन ने परिजनों के नहीं मानने पर शव को अपने कब्जे में लेकर पुलिस की ओर से अंतिम संस्कार कराने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए खखां गांव के पास पुलिस बल तैनात किया गया।

  • इससे पहले मृतक के पिता 82 वर्षीय कश्मीर सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि 26 दिसंबर को डीएसटी टीम उसके बेटे बलदेव सिंह को पूछताछ के लिए ले गई थी। कुछ देर बाद सूचना मिली कि पजावा पुल के पास उसकी तबीयत बिगड़ गई। टीम उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।