script सफेद सोने की ‘चमक’ हुई कम...और किसानों की आंखें नम | The 'shine' of white gold diminished...and farmers' eyes | Patrika News

सफेद सोने की ‘चमक’ हुई कम...और किसानों की आंखें नम

locationश्री गंगानगरPublished: Dec 05, 2023 01:24:47 am

Submitted by:

yogesh tiiwari

पिछले सीजन में जो नरमा छह हजार रुपए प्रति क्विंटल से शुरू होकर अंतिम दौर में करीब साढ़े 11 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था। उसी नरमा का भाव अब चार से सात हजार रुपए के बीच रह गया है। वहीं, प्रतिकूल मौसम व गुलाबी सुंडी की मार से उत्पादन भी काफी सिमट गया है। इससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।

सफेद सोने की ‘चमक’ हुई कम...और किसानों की आंखें नम
सफेद सोने की ‘चमक’ हुई कम...और किसानों की आंखें नम
श्रीकरणपुर (श्रीगंगानगर). पिछले सीजन में जो नरमा छह हजार रुपए प्रति क्विंटल से शुरू होकर अंतिम दौर में करीब साढ़े 11 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था। उसी नरमा का भाव अब चार से सात हजार रुपए के बीच रह गया है। वहीं, प्रतिकूल मौसम व गुलाबी सुंडी की मार से उत्पादन भी काफी सिमट गया है। इससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।
जानकारी अनुसार स्थानीय नई धानमंडी में 21 सितंबर को इस सीजन में सफेद सोने की पहली ढेरी पहुंची थी। तब दो दुकानों पर सात हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से करीब 18 क्विंटल नरमा खरीद किया गया। लेकिन ढाई माह बीतने के बाद यानी नरमा खरीद का आधा सीजन बीतने के बावजूद इसका भाव सात हजार से अधिक नहीं गया। इसके साथ बड़ी बात यह भी है कि इस सीजन में अभी तक यहां की नई धानमंडी में महज 60 हजार क्विंटल नरमा ही बेचान के लिए पहुंचा है जो पिछले साल के अपेक्षाकृत काफी हद तक कम है। बताया गया कि पिछले सीजन के अंत तक करीब ढाई लाख क्विंटल नरमा की खरीद हुई थी। इस बारे में यहां के नरमा खरीद-फरोख्त व्यापारियों प्रदीप तनेजा, पीके गुप्ता व अमित सिंगला आदि का कहना है कि इस बार नरमा की क्वांटिटी (मात्रा) के साथ क्वालिटी (गुणवत्ता) भी निम्न है। इसी वजह से नरमा का भाव नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि सोमवार को नई धानमंडी में आया नरमा 4300 रुपए से लेकर अधिकतम 6400 रुपए प्रति क्विंटल पर बिका। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 20 दिन पहले नरमे की एक ढेरी 7200 रुपए प्रति क्विंटल से बिकी थी।
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मौसम व गुलाबी सुंडी की मार पड़ी भारी
उधर, किसानों विक्रमजीत सिंह नौ ओ, मंगल सिंह बडिग़ां, अमनदीप सिंह व दर्शनलाल मेहता खरलां के मुताबिक पहले मौसम की मार और फिर गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमा का उत्पादन बहुत कम रह गया। वहीं, बचे हुए नरमे की गुणवत्ता बिगडऩे से अब भाव भी नहीं मिल रहे। इधर, नरमा की खराब फसल की चुगाई के लिए श्रमिक नहीं मिलने या मजदूरी अधिक लगने की वजह से कई किसानों ने बिना चुगे ही आगामी फसल के लिए जमीन पर रोटावेटर चला दिया।

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