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शिक्षक ने दिया दर्द, कलक्टर हुए चकित

जिस बच्चे को स्कूल में पढाने के लिए भेजा वहां टीचर ने ऐसा जख्म दिया कि जिसे देखकर कलक्टर भी चकित हो गए।

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The teacher gave the pain the clerk became astounded

शिक्षक ने दिया दर्द, कलक्टर हुए चकित

श्रीगंगानगर.

जिस बच्चे को स्कूल में पढाने के लिए भेजा वहां टीचर ने ऐसा जख्म दिया कि जिसे देखकर कलक्टर भी चकित हो गए। बच्चे के शरीर पर पिटाई के निशान देखकर जिला कलक्टर ने पुलिस अधीक्षक को फोन कर थाने में संबंधित टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा। कलक्टर के निर्देश पर कोतवााली पुलिस ने आखिरकार गुरुवार रात को गुरुनानक खालसा प्राइमरी स्कूल के टीचर जगदीप सिंह के खिलाफ मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।

इस मामले में पीडि़त के पिता ने रिपोर्ट दी कि उसका बेटा खालसा प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा का नियमित छात्र है। आठ साल का यह बालक बुधवार को होमवर्क करके नहीं गया। यह बात सुनकर गणित के टीचर जगदीप सिंह ने जमकर मारपीट की। सहमे इस बालक ने घर जाकर पूरी बात बताई तो शरीर पर पिटाई के निशान देखकर परिजनों ने रोष जताया। गुरुवार सुबह अभिभावक संघ के अध्यक्ष बॉबी पहलवान के साथ कलक्टर ज्ञानाराम के समक्ष हाजिर हुए। इस बालक ने कपड़े उतार कर अपने शरीर पर मारपीट के निशान दिखाए तो कलक्टर भी शर्मसार हो गए और बोले कि आज के जमाने में भी टीचर बर्बरता का ढर्रा नहीं छोड़ रहे। उन्होंने प्रसंज्ञान लेते हुए उसी समय पुलिस अधीक्षक से संबंधित टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा कर दी।


एसपी ऑफिस पहुंचते ही बजने लगी घंटियां
अभिभावक संघ के पदाधिकारियों के साथ पीडि़त बालक और उसके पिता जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिक्षक जगदीप सिंह के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचे तो वहां स्कूल से फोन की घंटियां बजने लगीं। अभिभावक संघ के अध्यक्ष ने बाल संरक्षण आयोग के सदस्य अर्जुन बागड़ी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई। स्कूल और टीचर से जुड़े लोग राजीनामा से यह मामला निपटाने के लिए दवाब देने लगे लेकिन मासूम बालक के साथ हुई घटना पर परिजन टस से मस नहीं हुए और कोतवाली आकर पूरे घटनाक्रम की लिखित में परिवाद दिया।


इससे तो सरकारी स्कूल अच्छे
चौथी कक्षा के छात्र के साथ टीचरों के ऐसे व्यवहार को देखकर परिजनों के मुंह से एक बात बार-बार निकल रही थी कि इससे अच्छा तो सरकारी स्कूल ही है, जहां मारपीट और आर्थिक दवाब तो नहीं होता। परिजनों का कहना था कि आर्थिक तंगी के बावजूद स्कूल में एडमिशन कराने के लिए महंगी फीस दी, इसके बावजूद बच्चे को यातनाएं मिली।

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