
श्रीगंगानगर.
राजकीय जिला चिकित्सालय में 14 करोड़ 19 लाख रुपए के तीन प्रोजेक्टस में एक में भी लंबे समय से कार्य शुरू नहीं हुआ। इनकी प्रक्रिया बेहद धीमी है। इस कारण लोगों को समय पर इनका लाभ नहीं पा रहा। इनमें 11 करोड़ रुपए की लागत से 50 बैड के एमसीएचयू, नर्सिंग व चतुर्थ श्रेणीकर्मियों के बीस आवासों के निर्माण कार्य की निविदाएं जारी नहीं हुई। तीन करोड़ रुपए मंजूर होने के बाद कंपोनेट मशीन की वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई। वहीं, 19 लाख रुपए की कैंटीन में एक पेड़ की अनुमति बाधा बनी हुई है।
अभी तक वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं
एक यूनिट रक्त से कई रोगियों की जान बचाई जा सकती है, यदि उसमें तत्व विभाजन कर दिया जाए। यानी आरबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, डब्ल्यूबीसी अलग-अलग कर रोगियों के चढ़ाए जाए। जिला चिकित्सालय में यह सुविधा नहीं है। राज्य सरकार ने बजट घोषणा में तीन करोड़ रुपए मंजूर किए थे। एनएचएम ने कंपोनेट मशीन स्थापित करने के लिए चिकित्सालय प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी थी। एनएचएम के अधिशासी अभियंता का कहना है कि कंपोनेट मशीन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार से अभी तक प्रशानिक और वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली।
लाभ- रक्त से तत्व विभाजन करने के लिए कंपोनेट मशीन स्थापित होती है तो रोगियों के हॉल ब्लड चढ़ाने से राहत मिलनी है। गर्भवती महिलाओं और नवजात में एनीमिया अधिक होता है। इसे दूर करने के लिए आरबीसी तत्व की जरूरत होती है पर उन्हें भी हॉल ब्लड चढ़ाना मजबूरी है। तत्व विभाजन की सुविधा शहर के एक निजी ब्लड बैंक में है।
ड्राइंग का अनुमोदन, निविदाओं की तैयारी
राजकीय जिला चिकित्सालय में 11 करोड़ रुपए की लागत से एमसीएचयू का 50 बैड का भवन बनना है। एनएचएम के अनुसार इसकी ड्राइंग का अनुमोदन हो चुका है और एस्टीमेट तैयार है। विभाग ने निविदाएं जारी करवाने के लिए मुख्यालय को फाइल भिजवाई है। जल्द ही निविदाएं जारी होंगी। इसके अलावा नर्सिंग और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 20 क्वार्टर है। इनको तोड़कर एमसीएचयू भवन के साथ नए क्वार्टर बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भी इनके साथी जारी किया जाएगा।
लाभ - जिला चिकित्सालय में 50 बैड का एमसीएचयू का निर्माण पहले से है। लेकिन गर्भवती व प्रसूताओं की संख्या के कारण रोगियों की संख्या को देखते हुए भवन छोटा पड़ रहा है। इस कारण गर्भवती व प्रसूताओं को परेशानी हो रही थी। लेकिन अब 100 बैड का एमसीएचयू होने पर गर्भवती व प्रसूताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
पेड़ कटाई की ली जा रही अनुमति
चिकि त्सालय में 19 लाख रुपए की लागत से रोगियों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए कैंटीन का निर्माण करवाया जाएगा। इसके लिए जगह फाइनल कर ली गई है। अब एक पेड़ बाधा बना हुआ है। इसकी कटाई के लिए वन विभाग से अनुमति मांगी गई थी। अब वन विभाग का कहना है कि पेड़ यूआईटी एरिया में आता है और वहीं से अनुमति लेनी होगी। अब यूआईटी से पेड़ कटाई की अनुमति ली जा रही है।
लाभ - जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन तीन से सवा तीन सौ रोगी भर्ती रहते हैं। इनको सुबह और शाम खाना, चाय आदि के लिए माकूल व्यवस्था होगी। कैंटीन बनने पर रोगियों और परिजनों को चाय आदि के लिए सड़क पार कर दूसरी तरफ नहीं जाना पड़ेगा।
एमसीएचयू के निर्माण कार्य के लिए निविदाएं लगाने के लिए मुख्यालय को भिजवाई गई है। कैंटीन निर्माण कार्य के बीच में एक पेड़ बाधा बना हुआ है। इसकी कटाई से पहले यूआईटी से अनुमति ली जा रही है। ब्लड कंपोनेट मशीन के लिए फिलहाल वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली।
आरके माथुर, एक्सईएन, एनएचएम, बीकानेर।
Published on:
14 Dec 2017 09:37 am
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