श्रीगंगानगर. गांव नेतेवाला में एक युवक की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में गिरफ्तार एससी/एसटी आरक्षण मंच और कांग्रेस पदाधिकारी नाथांवाला निवासी कालूराम मेघवाल व नेतेवाला गांव निवासी सुनील कुमार को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। चूनावढ़ थाना प्रभारी तेजवंत सिंह की अगुवाई में पुलिस दल ने इन दोनों आरोपियों को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो की अदालत में पेश किया। भारी भरकम पुलिस जाब्ते को देखकर कोर्ट परिसर में खलबली मच गई। अधिवक्ताओं, न्यायिक कार्मिकों और आरोपी कालूराम मेघवाल के समर्थक और परिजन भी पहुंचे। अदालत ने चौदह दिन के लिए दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश किए।
इस दौरान बचाव पक्ष के वकील चरणदास कम्बोज ने जमानत याचिका पेश नहीं की लेकिन मेडिकल मुआयना कराने के लिए अदालत से गुहार की। अदालत ने जेल प्रशासन को मेडिकल मुआयने के लिए अधिकृत किया। ज्ञात रहे कि चूनावढ़ पुलिस ने गांव नेतेवाला निवासी 30 वर्षीय प्रेमकुमार मेघवाल पुत्र रामचंद्र की पीट पीटकर हत्या करने के मामले में मृतक के बड़े भाई विनोद मेघवाल की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया था। इसमें बताया कि नेतेवाला के कालूराम मेघवाल, नेतेवाला निवासी सुनील मेघवाल पुत्र बनवारीलाल, नाथांवाला निवासी सुनील के फूफा तथा उसके बेटे सहित तीन-चार अन्य ने शनिवार रात के समय घर में घुसकर प्रेम कुमार को नीचे गिरा लिया और उसके मुंह, नाक पर हाथ रखकर दबा लिया। इन लोगों ने प्रेमकुमार मेघवाल को इतना ज्यादा पीटा कि उसकी मौत हो गई। परिजनों ने प्रेम कुमार को राजकीय जिला चिकित्सालय पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस बीच, अदालत परिसर में आरोपी कालूराम मेघवाल के समर्थन में कई कांग्रेसी, वामपंथी और भाजपाई भी पहुंचे। इस दौरान अनूपगढ़ के पूर्व विधायक पवन दुग्गल ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि इस मामले में चूनावढ़ एसएचओ ने अपनी रड़क निकाली है। इस घटना में कालूराम को मुख्य आरोपी जानबूझकर बनाया है जबकि कालूराम अपने घर में सो रहा था लेकिन रात को तीन बजे पुलिस ने जबरन उसे उठाया और ले गई।
लालगढ़ में करीब एक महीने पहले एक बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में परिजनों का कालूराम ने समर्थन किया था। उस दौरान लालगढ़ में यही एसएचओ था जो अब चूनावढ़ में है। इस कारण रंजिशवंश पूरे प्रकरण में कालूराम की भूमिका नहीं होने के बावजूद उसे फंसाया गया। पुलिस अनुसंधान की नए सिरे से जांच कराने के लिए प्रयास करेंगे। दुग्गल के अनुसार अब न्यायिक पालिका पर पूरा भरोसा है कि वह पूरे मामले में न्याय करेगा। चूनावढ़ थाने में कालूराम के साथ कथित मारपीट के संबंध में अदालत से मेडिकल मुआयना कराने का आग्रह किया है।
इस बीच, प्रेम कुमार का पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग लेकर शव लेने से इंकार कर दिया था। इस पर पुलिस के हाथ पांव फूल गए थे लेकिन रविवार रात को ही आरोपी कालूराम मेघवाल और सुनील कुमार को गिरफ्तार करने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार करने पर अपनी सहमति जताई। सोमवार को सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे प्रेम कुमार का शव राजकीय जिला चिकित्सालय से लिया और उसे नेतेवाला गांव लेकर गए। परिजनों ने गांव में ही अंतिम संस्कार कराया। इधर, अन्य आरोपियों के लिए पुलिस ने कई जगह दबिश दी है। लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया।
इस पूरे प्रकरण में एक महिला को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है।
इस महिला के घर पर प्रेम कुमार के एक परिजन का आना जाना था लेकिन वह मौके से चला गया था लेकिन कालूराम आदि लोगों ने प्रेम कुमार से झगड़ा कर लिया। इस दौरान प्रेम कुमार की मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने अभी तक पुष्टि नहीं की है। लेकिन ग्रामीणों ने दबी जुबान में पूरी कहानी बयां कर दी है। नेतेवाला के ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीस वर्षीय प्रेम कुमार ज्यादातर गांव में नहीं रहता। वह सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइन बिछाने वाली ठेका कंपनी एलएंडटी कंपनी में प्लंबर के पद पर नौकरी करता था। इस कारण वह जिले से बाहर ज्यादातर रहता। लेकिन कुछ दिन पहले ही वह गांव में आया था। वापस जाने की तैयारी कर रहा था कि शनिवार को हुए झगड़े में उसकी मौत हो गई।