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श्री गंगानगर

सूरतगढ़ थर्मल में गुजरात से आए फ्यूल ऑयल में पानी की मिलावट

फ्यूल ऑयल के टैंकरों को सीज कर थर्मल पुलिस के सुपुर्द

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थर्मल की तकनीकी टीम की मौजूदगी में जिला रसद अधिकारी ने लिए सैम्पल
सूरतगढ़ थर्मल (श्रीगंगानगर). रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी से सूरतगढ़ थर्मल को आपूर्ति के लिए दो टैंकरों में आए फ्यूल ऑयल एलडीओ में पानी की मिलावट मिली है। थर्मल की तकनीकी टीम की मौजूदगी में जिला रसद अधिकारी ने शनिवार को दोनों टैंकरों में भरे फ्यूल ऑयल के तीस सैम्पल लिए। प्रथम दृष्टया पानी की मिलावट साबित होने पर दोनों टैंकरों को सीज कर थर्मल पुलिस चौकी के सुपुर्द किया गया है।

फ्यूल ऑयल एलडीओ का उपयोग सूरतगढ़ सब क्रिटिकल तापीय परियोजना के बॉयलर को लाइटअप करने में होता है। फ्यूल ऑयल में मिलावट की शिकायत मिलने पर थर्मल पुलिस चौकी के स्टाफ ने सोमवार रात दोनों टैंकरों को थर्मल गेट पर रोक लिया था। तभी से यह टैंकर पुलिस चौकी में खड़े थे। सैम्पल लेते समय पुलिस टीम तथा जयपुर व जामनगर से आए ट्रांसपोर्टर भी मौजूद रहे। रिलायंस के अधिकारियों ने इस कार्यवाही से अपने को अलग रखा। दोनों टैंकरों के चालक गायब बताए गए हैं।


सैम्पल लेने की कार्यवाही दिनभर चली।
जिला रसद अधिकारी राकेश सोनी और उनकी टीम ने दोनों टैंकरों की सील तोड़ कर उनके पांच-पांच कम्पाउंड की जांच की। यह जांच हाटर फाइंडिंग पेस्ट की मदद से हुई। जिला रसद अधिकारी ने बताया कि टैंकर नम्बर आरजे 13 जीबी 5659 के पांच-पांच हजार लीटर क्षमता के चार कम्पाउंडों में पानी की मिलावट मिली जबकि चार हजार लीटर वाले कम्पाउंड में कोई मिलावट नहीं मिली।

दूसरे टैंकर आरजे 14 जीएच 5574 के एक पांच हजार वाले एक कम्पाउंड में पानी की मिलावट की पुष्टि हुई। इस टैंकर के चार हजार लीटर वाले एक तथा पांच हजार लीटर वाले तीन कम्पाउंड सही पाए गए। सैम्पलों को जांच के लिए एसएफएल भेजा जाएगा।


– फ्यूल का सरकारी रेट 65 रुपए प्रति लीटर
जिला रसद अधिकारी ने बताया कि फ्यूल ऑयल एलडीओ का सरकारी रेट 65 रुपए प्रति लीटर है। थर्मल को यह किस रेट से सप्लाई किया जा रहा था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने बताया कि दोनों टैंकरों में पांच-पांच हजार लीटर वाले पांच कम्पाउंडों और चार हजार लीटर वाले एक कम्पाउंड में पानी की मिलावट मिली है।

पांच हजार लीटर वाले तीन और चार हजार वाले एक कम्पाउंड में भरे फ्यूल ऑयल में कोई मिलावट नहीं मिली। जांच में 29 हजार लीटर मिलावटी पाए गए फ्यूल ऑयल को पानी मान लिया जाए तो सरकारी रेट से यह मामला 18 लाख से भी अधिक राशि के घपले का है।


– मिलावट से थर्मल उपकरणों को नुकसान
तकनीकी जानकारों की मानें तो थर्मल की इकाइयों के बॉयलर को लाइटअप करने की प्रक्रिया के प्रथम चरण में बॉयलर में लगी ऑयल गनों से तेज प्रेशर से एलडीओ को जलाया जाता है, यदि एलडीओ में पानी की मात्रा होगी तो बॉयलर का तापमान देरी से आएगा।

इससे ऑयल की खपत अधिक होगी वहीं इकाई से बिजली उत्पादन भी देरी से शुरू होगा। विद्युत उत्पादन इंटक के प्रदेश महामंत्री श्याम सुंदर शर्मा ने थर्मल में आपूर्ति होने वाले एलडीओ की जांच करने वाले रसायन विभाग व फ्यूल विभाग पर सवाल उठाते हुए परियोजना में स्थापित एलडीओ टैंकों की जांच बाहरी एजेंसी से करवाने सहित इस मामले में संलिप्त विभागों के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि ये मामला तो पुलिस की सतर्कता से सामने आ गया। परियोजना में इससे पूर्व में आए रहे टैंकरों में भी इस तरह की मिलावट संभव है।


– राजियासर क्षेत्र में बिक्री
यह जानकारी भी सामने आई है कि थर्मल को जिस फ्यूल ऑयल की आपूर्ति हो रही है उसकी बिक्री बैरल प्वाइंटों पर राजियासर सहित कई स्थानों पर होती रही है। वाहनों में इसका उपयोग डीजल के रूप में होता है। वाहन चालकों यह फ्यूल ऑयल 60 रुपए लीटर के हिसाब से मिल जाता है।


– जिला कलक्टर ने दिए आदेश
थर्मल पुलिस चौकी ने मिलावट की शिकायत पर सोमवार रात दोनों टैंकरों को थर्मल गेट पर रोक कर इसकी सूचना जिला रसद अधिकारी को दी। इस पर जिला रसद अधिकारी रात में ही थर्मल पुलिस चौकी पहुंच गए। टैंकरों में भरे फ्यूल ऑयल के सैम्पल लेने के लिए जिला रसद अधिकारी ने थर्मल की तकनीकी टीम की मदद मांगी तो टीम ने थर्मल गेट से बाहर खड़े टैंकरों की जांच में सहयोग से यह कह कर इनकार कर दिया गेट से बाहर जाकर टीम जांच नहीं करती।

जिला रसद अधिकारी ने इसके बाद प्रकरण की रिपोर्ट जिला कलक्टर सौरभ स्वामी को दी तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और सैम्पल लेने के आदेश कर दिए। उसके बाद जिला रसद अधिकारी सैम्पल लेने के लिए थर्मल चौकी गए तो उन्हें यह जानकारी मिली कि रिलायंस के अधिकारियों के आने के बाद ही सैम्पल लेने की कार्यवाही होगी। आखिरकार छठे दिन शनिवार को सैम्पल लेने की कार्यवाही पूरी हुई तो सारा मामला सीसे की तरह साफ हो गया।


– रिलायंस की टीम ने किया किनारा
मुंबई, जामनगर व जयपुर से आए रिलायंस के अधिकारियों ने जांच में हिस्सा नहीं लिया। अधिकारियों का कहना था कि रिफ़ाइनरी से टैंकरों की निकासी चालक की देखरेख में सील लगने के बाद होती है। इसके बाद थर्मल तक उसे सुरक्षित पहुंचाने तक सारी जिम्मेदारी चालक की होती है।


– सैंपल लेने में इनकी रही भूमिका
सैम्पल लेने की कार्यवाही के दौरान जिला रसद अधिकारी राकेश सोनी, प्रवर्तन अधिकारी संदीप गौड व विजेन्द्र पाल, प्रवर्तन निरीक्षक पूजा अग्रवाल, धर्मपाल व सरोज, सूरतगढ तापीय परियोजना के वरिष्ठ इंजीनियर रामकुमार शर्मा के नेतृत्व में रसायन विभाग सहित फ्यूल, स्टोर, कोल हैंडलिंग प्लांट के अधिकारियों की टीम, दोनों टैंकरों के ट्रांसपोर्टर, राजियासर थाना प्रभारी सत्यनारायण गोदारा व थर्मल चौकी उप निरीक्षक पृथ्वीराज बिश्नोई उपिस्थत रहे। रिलायंस के अधिकारियों ने सैम्पल लेने संबंधी कार्यवाही के किसी भी दस्तावेज पर साइन करने से इनकार कर दिया।