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‘आप सीख चुकी, अब बालिकाओं में भी नजर आए आत्मरक्षा का हुनर’

रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण सम्पन्न, प्रतिभागियों को सिखाया कर्तव्यनिष्ठा का पाठ

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‘आप सीख चुकी, अब बालिकाओं में भी नजर आए आत्मरक्षा का हुनर’

‘आप सीख चुकी, अब बालिकाओं में भी नजर आए आत्मरक्षा का हुनर’

श्रीकरणपुर. आप सीख चुकी हैं और अब स्कूल की बालिकाओं में भी आत्मरक्षा का हुनर नजर आना चाहिए। सीबीइओ शक्तिरानी कटारिया ने यह बात सोमवार को एक निजी महाविद्यालय में सात दिवसीय रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर कही।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता सीबीइओ कटारिया ने कहा कि आत्मरक्षा के गुर व मार्शल आर्ट सीखकर बालिकाओं में आत्मबल व आत्मविश्वास में निश्चित रूप से वृद्धि होगी और वे मजबूत हौसलों के साथ आगे बढ़ सकेंगी। उन्होंने प्रशिक्षित अध्यापिकाओं को स्कूल में पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण देने की बात कही। शिविर प्रभारी व्याख्याता मीना देवी व गगनदीप कौर ने कहा कि समाजकंटकों को सबक सिखाने के लिए महिलाओं को आत्मरक्षा का हुनर सीखना बेहद जरूरी है। एसीबीइओ सुरेंद्र अरोड़ा ने प्रशिक्षण के दौरान हुई चार्ट बनाओ प्रतियोगिता में आत्मरक्षा के उपायों व अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं संबंधी उकेरे गए चित्रों की सराहना की। उन्होंने बताया कि शिविर में उच्च प्राथमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों की 97 शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। सीबीइओ कार्यालय के आरपी अमनदीप कौर, जगमीत सिंह, एओ राजपाल सिंह व एएओ शिवराजसिंह खोसा ने भी विचार व्यक्त किए। स्कूलों में निष्ठा से प्रशिक्षण कराने संबंधी संकल्प के साथ शिविर का समापन किया गया। शिक्षक जसविंद्र मान, मनजीत सिंह, चंद्रप्रकाश व सुमन आहुजा आदि ने व्यवस्था में सहयोग किया।

उनके हाथ में हो हथियार हो तो ऐसे करें वार...

उधर, अंतरराष्ट्रीय रेफरी डॉ.शेर सिंह व राजवीर कौर ने शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को अस्त्र-शस्त्र से बचाव की जानकारी भी दी। उन्होंने लाठी, चाकू, पिस्तौल के साथ एसिड अटैक से बचाव के उपाय बताए। मास्टर ट्रेनर रजनी नागपाल, हरविंदर कौर, रतनदीप कौर व सुमनजीत कौर ने व्यायाम, जूडो कराटे व आत्मरक्षा के अन्य गुर सिखाए। वहीं, नाखुते अटैक सहित मार्शल आर्ट व जूडो संबंधी आत्मरक्षा कौशलों का प्रदर्शन भी किया गया।

आत्मा की सुरक्षा के लिए अपनाएं जीवन मूल्य

प्रशिक्षण के दौरान प्रेरक व्याख्यान का आयोजन भी हुआ। इसमें ब्रह्मकुमारी वंदना दीदी व भारती ने कहा कि नैतिकता, मानवता, सामाजिकता व आध्यात्मिकता आदि से जुड़े जीवन मूल्यों को अपनाने से ना केवल शरीर बल्कि आत्मा की भी सुरक्षा होगी। वहीं, प्रशिक्षक राधेश्याम छाबड़ा ने कहा कि ध्यान हमारे तनाव को दूर कर हमारी आध्यात्मिक व आंतरिक शक्ति को उजागर करता है और परमात्मा से जोडऩे में मदद करता है।

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