23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नक्सलियों की खतरनाक साजिश: जवानों को 400 मी. लंबे ‘वी शेप’ एंबुश में फंसाया, फिर बैरल ग्रेनेड लांचर से की हैवी फायरिंग

Sukma Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में शनिवार को नक्सली जवानों को निशाना बनाने के लिए पूरी तैयारी आए थे। पत्रिका की टीम जब घटनास्थल पहुंची तो वहां का मंजर देखकर समझ में आया कि नक्सलियों ने कितनी खतरनाक साजिश रची थी।

2 min read
Google source verification
नक्सलियों की खतरनाक साजिश

नक्सलियों की खतरनाक साजिश

Sukma Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में शनिवार को नक्सली जवानों को निशाना बनाने के लिए पूरी तैयारी आए थे। पत्रिका की टीम जब घटनास्थल पहुंची तो वहां का मंजर देखकर समझ में आया कि नक्सलियों ने कितनी खतरनाक साजिश रची थी।

बताया जाता है कि नक्सल बटालियन की एक नम्बर की कम्पनी के लगभग 90-100 की संख्या में नक्सली वहां मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल पर नक्सलियों ने वी शेप में लगभग 400 मीटर लम्बा एम्बुश लगाया हुआ था। यह एम्बुश कैम्प से लगभग डेढ़ किमी की दूरी पर लगा हुआ था लेकिन जवानों को इसकी भनक भी नही लग पाई थी। अन्य जवानों की खुशकिस्मती यह थी कि वे बाइक में एक दूसरे से दूरी बना कर चल रहे थे। नक्सलियों के एम्बुश में पहली 3 मोटरसाइकिल ही आ पाई थी।

नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिग की जिससे गोली सामने के जवानों को लगी और वे वही ढेर हो गए। फायरिग की आवाज सुनकर पीछे से आ रहे जवान भी चौके और उन्होंने तत्काल बाइक छोड़कर आसपास मोर्चा सम्हाला। पुलिस एवं नक्सलियों के बीच लगभग एक घण्टे तक फायरिंग हुई। नक्सलियों ने इस दौरान देसी बीजीएल ( बैरल ग्रेनेड लांचर) का जमकर उपयोग किया।

पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगभग 60 से अधिक बीजीएल के शेल बरामद किए। इस घटना में एएसआई रामूराम नाग जो कि डीआरजी की पार्टी को लीड कर रहे थे। घटना स्थल पर शहीद हो गए उनके पीछे की बाइक में चल रहे आरक्षक कुंजाम भीमा एवं वंजाम भीमा भी शहीद हो गए।

यह भी पढ़ें: गोदावरी माइंस का मामला: शिकायत के एक साल बाद भी अफसरों ने नहीं की कार्रवाई, नियमों को ताक में रखकर किया जा रहा संचालन

चिंतागुफा से एक दिन पहले ही जगरगुंडा पहुंचे थे जवान
पुलिस के जवानों ने बताया कि डीआरजी की यह टीम जिसमे 40 जवान शामिल थे। वे एक दिन पूर्व ही चिंतागुफा से जगरगुंडा पहुंचे थे लेकिन दूसरे दिन ही इन जवानों को फिर से गश्त में जाने के निर्देश दे दिए गए। बताया जाता है कि जवान थके हुए होने के बावजूद ड्यूटी में जाने के लिए निकल गए थे। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की भनक स्थानीय पुलिस थाने को भी नही लगी जबकि नक्सली इलाके में दो दिनों से सक्रिय थे।

फरार हुए नक्सली
जवानों ने भी पोजीशन लेकर जवाबी गोलीबारी करनी शुरू की। दोनों ओर से करीब 20 मिनट तक चली मुठभेड़ के बाद जवानों को हावी होता देख नक्सली घटनास्थल से भाग निकले। इसके बाद जवान अपने साथी का शव लेकर नारायणपुर पहुंचे। यहां पर सलामी देकर शव को सड़क मार्ग से जशपुर के लिए रवाना किया गया।

डीजीपी जुनेजा पहुंचे जगरगुंडा, जवानों एवं परिजनों से मिले
रविवार को डीजीपी अशोक जुनेजा, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानन्द, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, डीआईजी कमलोचन कश्यप सहित वरिष्ठ अधिकारी आज जगरगुंडा पहुंचे। डीजीपी ने पीड़ित परिवार से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया और संवेदना प्रकट की, जवानों की शहादत को उन्होंने नमन किया और शासन की अनुग्रह राशि भी प्रदान की। बाद में उन्होंने डीआरजी जवानों से भेंटकर घटना की पूरी जानकारी प्राप्त की। जवानों की बहादुरी की उन्होंने प्रशंसा भी की।