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काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा में सेंध

मॉक ड्रिल के दौरान खुला रह गया हाइड्रोलिक गेट,एसपी ने प्वाइंट प्रभारी समेत चार के खिलाफ दिए जांच के आदेश

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Vikas Verma

Jan 31, 2016

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा में कभी भी सेंध लग सकती है। सुरक्षाकर्मी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे जिससे आने वाले दिनों में कभी भी खतरा हो सकता है। आतंकी हमले की धमकी के बीच वाराणसी पुलिस इन दिनों लगातार महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा अभ्यास कर रही है। आतंकी घटना से निबटने के लिए शनिवार को काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में सुरक्षा अभ्यास किया गया। इस दौरान सुरक्षा-व्यवस्था में कई स्थानों पर चूक देखने को मिली। मॉक ड्रिल प्रभारी एसपी ट्रैफिक ने रेड जोन में तैनात प्वाइंट प्रभारी समेत चार के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के साथ जांच के आदेश दिए हैं।
विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र की सुरक्षा-व्यवस्था परखने के लिए एसएसपी आकाश कुलहरि के आदेश पर एसपी ट्रैफिक के नेतृत्व में मॉक ड्रिल हुआ। शुरूआत सायरन बजने से हुई। सायरन बजते ही सुरक्षाकर्मियों ने मंदिर परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों को सेफ जोन में पहुंचाया। जांच के दौरान जब एसपी ने देखा कि रेड जोन के सरस्वती फाटक का हाइड्रोलिक गेट के बंद होने के बाद भी ताला न बंद देख हड़कंप मच गया। ड्यूटी प्वाइंट प्रभारी मौके से नदारद थे। मौके पर तैनात अन्य सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ हुई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। पूछताछ चल ही रही थी कि ड्यूटी प्वाइंट प्रभारी अपनी पैंट की बेल्ट बांधते हुए दौड़ते नजर आए। बताया कि शौचालय गए थे। एसपी व अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने फटकार लगाई। मॉक ड्रिल शुरू होने से दस मिनट पूर्व तक कंट्रोल रुम से वायरलेस सेट के जरिए सभी को सावधान किया गया था, इसके बाद भी सरस्वती फाटक के प्रभारी के मौके से गायब रहने को गंभीरता से लेते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। मॉक ड्रिल के दौरान भैरव कोठरी द्वार भी बंद नहीं किया गया था जिससे अधिकारियों में नाराजगी थी। एसपी ने मॉक ड्रिल के दौरान लापरवाही बरतने के मामले में ड्यूटी प्वाइंट प्रभारी व चार सिपाहियों के खिलाफ जांच के आदेश के साथ ही कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
नाम की हाई पावर कमेटी, होती रहेगी लापरवाही
काशी की पहचान बाबा का दरबार है। प्रशासनिक नियंत्रण में आने के बाद से मंदिर परिक्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर पूरी फौज उतार तो दी गई लेकिन सुरक्षा में जगह-जगह ऐसे छेद हैं कि बस इतना ही समझ लीजिए कि विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र की सुरक्षा भी भोलेनाथ के ही भरोसे हैं। प्रदेश सरकार ने कुछ वर्षों पूर्व अयोध्या, काशी व मथुरा के मंदिरों की सुरक्षा के बाबत तमाम तामझाम की व्यवस्था, निरीक्षण व अन्य मामलों के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया। इसमें केंद्र से लेकर प्रदेश तक की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों से लेकर डीजी, आइजी से लगायत एसएसपी तक होते हैं। कमेटी की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक तीन महीने में तीनों स्थाानों का निरीक्षण व सुरक्षा से संबंधित सामानों की उपलब्धता व मांग की रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजनी होती है। शुरूआती दौर में तो हर तीन माह बाद वाराणसी में अधिकारियों की फौज जुटती थी लेकिन धीरे-धीरे मीटिंग मनमाने ढंग से बुलाई जाने लगी। एक वर्ष पूर्व तो नौ माह से अधिक समय व्यतीत होने पर हाई पावर कमेट की बैठक शुरू हुई थी।
एनएसजी भी कर चुकी है बाबा दरबार में मॉक ड्रिल
मोदी के वाराणसी से सांसद चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री बनते ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ेने वाराणसी में सबसे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था परखी थी। आपात स्थिति में मॉक ड्रिल का अभ्यास कराया गया जिसके तहत एनएसजी के कमांडो वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से यहां एक घंटे में पहुंचे और उसके बाद ज्ञानवापी परिक्षेत्र में सुरक्षा अभ्यास अभियान चलाया। एनएसजी के पास विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र का ब्लू प्रिंट मौजूद हैं। आपात स्थिति में एनएसजी तो आ जाएगी लेकिन मंदिर परिक्षेत्र में तैनात सुरक्षाकर्मी दहशतगर्दों से मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।

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