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ऋणी किसानों की जमीन बंधक करने से बच रहे समिति प्रबंधक

जिले में 82 फीसदी लक्ष्य पूरा, कुछ समितियां 50 प्रतिशत भी नहीं कर पाई

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Questions arising on fake loan disbursement

Questions arising on fake loan disbursement

टीकमगढ़. सहकारी बैंक ने अपने ऋण को सुरक्षित करने अब ऋणी किसानों की जमीन को दृष्टि बंधक करने की कार्रवाई शुरू की है। यह काम 20 अक्टूबर तक पूरा किया जाना है, लेकिन कुछ समितियों द्वारा इस काम में लगातार लापरवाही करने से यह लक्ष्य अब रूक कर रह गया है। कुछेक समितियों द्वारा की जा रही लापरवाही से यहां पर फर्जी ऋण वितरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे है।


विदित हो कि जिला सहकारी बैंक द्वारा अपनी तमाम समितियों के द्वारा जिले के 45 हजार किसानों को ऋण वितरण किया गया है। इन किसानों पर बैंक का 155 करोड़ रुपए ऋण बकाया है। इसमें से बहुत सा ऋण कालातीत हो चुका है और किसान चुकता नहीं कर रहे है। ऐसे में शासन ने बैंक की राशि को सुरक्षित करने के लिए ऋणी किसानों की जमीन को दृष्टि बंधक करने काम शुरू किया है, ताकि बिना ऋण चुकान कोई किसान अपनी जमीन को बेच न सकें। ऐसे में जिले में यह काम तेजी से चल रहा है। जिले में अब तक 37090 किसानों की जमीन दृष्टि बंधक की जा चुकी है।

20 अक्टूबर तक होना है काम पूरा
इस मामले में 4 अक्टूबर को कृषि उत्पादन आयुक्त ने सभी बैंकों की समीक्षा की थी। इसमें आयुक्त द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यह काम 20 अक्टूबर तक पूरा किया जाए। इसके बाद बैंक ने सभी समितियों को समय से काम पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी कुछ समितियों द्वारा लगातार काम में लापरवाही की जा रही है। ऐसे में पूरे जिले का काम प्रभावित हो रहा है। बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय सिंघई का कहना है कि इस संबंध में उपायुक्त सहाकारिता को पत्र जारी कर संबंधित समितियों को निर्देश देने को कहा गया है।

यह समितियां फिसड्डी
विदित हो कि जिले में दृष्टि बंधक का काम जहां 82 प्रतिशत हो चुका है, वहीं कुछ समितियां है जो अब तक 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं कर सकी है। लक्ष्य से पीछे चलने वाली समितियों में सबसे पहले घूघसी का नाम आ रहा है। यहां पर मात्र 27 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। इस समिति से कुल 267 किसानों ने ऋण लिया था, जबकि समिति द्वारा मात्र 73 लोगों की जमीन ही दृष्टि बंधक की गई है। ऐसे ही कुडयाला में 30 प्रतिशत, सिमराखास में 37, जेवर में 45, पलेरा में 48 एवं गुना में 49 प्रतिशत किसानों की जमीन ही दृष्टिबंधक की गई है। तमाम निर्देशों के बाद भी यहां पर कम न होने से फर्जी ऋण वितरण को लेकर सवाल किए जा रहे है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जितने भी ऋणी किसान दर्ज है, सभी की जमीन दृष्टिबंधक की जाएगी।

कहते है अधिकारी
कुछ समितियों द्वारा काफी धीमी गति से काम किया जा रहा है। ऐसे में समिति एवं उनके प्रशासन, प्रबंधकों की जानकारी उपायुक्त सहकारिता के पास भेजी गई है। तमाम ऋणी किसानों की जमीन दृष्टिबंधक करने पूरे प्रयास किए जा रहे है। 20 अक्टूबर के पूर्व यह काम पूरा कर लिया जाएगा।- अजय सिंघई, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सहकारी बैंक, टीकमगढ़।