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मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष से 50 लाख रुपए के गबन, 18 प्रतिशत ब्याज सहित राशि जमा कराने के नोटिस किए जारी

राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष से 50 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आने के बाद वर्तमान चिकित्सा प्रभारी ने आरोपी तात्कालीन चिकित्सा प्रभारी रहे तीन चिकित्सकों को 18 प्रतिशत ब्याज वसूली समेत गबन की राशि जमा कराने के नोटिस जारी किए हैं।  

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Dec 29, 2022
मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष से 50 लाख रुपए के गबन, 18 प्रतिशत ब्याज सहित राशि जमा कराने के नोटिस किए जारी

मालपुरा. राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष से 50 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आने के बाद वर्तमान चिकित्सा प्रभारी ने आरोपी तात्कालीन चिकित्सा प्रभारी रहे तीन चिकित्सकों को 18 प्रतिशत ब्याज वसूली समेत गबन की राशि जमा कराने के नोटिस जारी किए हैं।

राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष से लगभग 50 लाख रुपए का गबन करने का मामला ऑडिट में सामने आने के बाद चिकित्सा प्रभारी डॉ. अनिल मीणा की ओर से सम्बंधित तात्कालीक चिकित्सा प्रभारी डॉ. अर्जूनदास, डॉ. अमित सक्सैना व डॉ. विद्या मघनानी को गबन की राशि जमा कराने के नोटिस जारी किया है।

नोटिस जारी होने के बाद मामले में दोषी डॉ. अमित सक्सैना ने गबन की राशि एक लाख 88 हजार 600 रुपए जमा करवा दी है। वहीं दो अन्य चिकित्सा प्रभारियों ने विभाग से ऑडिट की जांच रिपोर्ट मांगी है। साथ ही विभाग के तहत जारी नोटिस को भी गलत ठहराया है।

जबकि गत महीने चिकित्सा विभागीय अंकेक्षण दल की ओर से की गई वर्ष 2011 से अब तक के रिकॉर्ड की जांच के बाद राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी को प्रेषित की गई थी। जांच रिपोर्ट में उक्त गबन करने का प्रकाश में आया था।

इसके बाद ही सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल मीणा ने तात्कालीक चिकित्सा प्रभारी रहे सेवानिवृत्त डॉ. अर्जुनदास को 36 लाख 54 हजार 458 रुपए, डॉ. अमित सक्सेना को एक लाख 88 हजार 600 रुपए तथा डॉ. विद्या मघनानी को 11 लाख रुपए 30 हजार 777 रुपए की राशि 18 प्रतिशत ब्याज समेत जमा कराने का नोटिस जारी किया है। तीनों चिकित्सक अपने-अपने समय में अस्पताल के प्रभारी रहे हैं।

इनको बताया रिपोर्ट में दोषी

विशेष लेखा जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल कार्यालय कर्मी कनिष्ठ लेखाकार कल्पना प्रजापत व कनिष्ठ सहायक सलीम नकवी को भी दोषी बताया गया है। विभागीय अंकेक्षण जांच दल की ओर से मेडिकल रिलिफ सोसायटी कोष में गबन का मामला उजागर होने के बाद अस्पताल कर्मियों व अधिकारी में हड$कंप मचा हुआ है। बीते माह प्रथम चरण में चिकित्सा विभागीय अंकेक्षण के सामान्य दल की ओर से अस्पताल रिकॉर्ड की ऑडिट की गई थी।


गबन संबंधी मामला प्रथम चरण में ही जांच दल के सामने आ गया, इसके बाद विभागीय कारणों से मामले की रिपोर्ट निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के समक्ष प्रस्तुत की गई।

दूसरे चरण में सत्यता प्रमाणित हुई

दूसरे चरण में मालपुरा अस्पताल पहुंचकर गहन जांच-पड़ताल में गबन राशि की सत्यता प्रमाणित की गई। इधर, चिकित्सा विभागीय अंकेक्षण जांच में गबन मामले में दोषी पाए गए अस्पताल प्रभारी रहे डॉ. अर्जुन दास ने बताया कि मेडिकल रिलीफ सोसायटी कोष की राशि में गबन के मामले की जानकारी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मिली है।

इसका लेखा-जोखा करने वाले एनआरएचकर्मी व जूनियर अकाउंटेंट को समय-समय पर लेखा कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। जानकारी कर समुचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सम्बधित चिकित्सा प्रभारियों को दिए गए नोटिस को गलत बताया। उनका कहना है कि अस्पताल से ऑडिट जांच की रिपोर्ट मांगी गई है, अगर गबन किया होता तो उनके खाते में पैसा जमा होता।

प्रभारी का काम सुपरवाइजर का
प्रभारी रहे डॉ. अमित सक्सेना ने बताया कि प्रभारी का काम सुपरवाइजर का रहता है। कागजी काम की जिम्मेदारी कार्यालय कर्मियों की रहती है। इसके बावजूद अगर कार्य में कोताही हुई है तो सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।

सामुदायिक अस्पताल के प्रभारी डॉ. अनिल मीणा ने बताया कि विभागीय जांच दल की रिपोर्ट अनुसार अस्पताल में वर्ष 2011 से अब तक 50 लाख का गबन किए जाने का मामला उजागर हुआ है। सम्बधित तात्कालिक चिकित्सा प्रभारी रहे डॉ. अर्जुनदास, डॉ. अमित सक्सेना व डॉ. विद्या मघनानी को ब्याज सहित राशि जमा करानें के नोटिस जारी किए गए हैं।

Published on:
29 Dec 2022 01:37 pm
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