7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bulldozer Action: तालाब की जमीन पर काटी अवैध कॉलोनी, चला नगर परिषद का बुलडोजर

Tonk News: टोंक शहर के जलाशयों और अवैध कॉलोनियों पर नगर परिषद कार्रवाई कर रही है।

2 min read
Google source verification

टोंक

image

Anil Prajapat

Feb 07, 2026

Tonk Municipal Council

तालाब की जमीन पर बनी सडक़ को खुर्दबुर्द करती जेसीबी। फोटो: पत्रिका

Tonk News: टोंक शहर के जलाशयों और अवैध कॉलोनियों पर नगर परिषद कार्रवाई कर रही है। इसके तहत नगर परिषद ने शुक्रवार को नहल-पलाड़ा रोड पर निजी कॉलेज और पेट्रोल पंप के पास अवैध रूप से तालाबी भूमि पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी को खुर्दबुर्द किया है। नगर परिषद की प्रवर्तन टीम ने मौके पर बनाए जा रहे रोड को जेसीबी के माध्यम से काट दिया। साथ ही मौके पर अवैध कॉलोनी का बोर्ड लगा दिया। यह यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

गौरतलब है कि टोंक शहर के तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण और उनकी मिट्टी डालकर भराई की समस्या पर गत दिनों नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट की ओर से तहसीलदार भगवतीलाल जैन को भेजे गए पत्र के बाद तालाबों के सीमांकन के लिए टीम का गठन किया गया है। यह टीम तालाबों का सीमांकन करेगी।

टीम को अगर जलाशय, कैचमेंट और निकास क्षेत्र में कॉलोनी या किसी प्रकार का निर्माण मिलने पर कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने जलाशयों में हो रहे अतिक्रमण, निर्माण और भराव को लेकर शृंखलाबद्ध खबरों का प्रकाशन किया है। इसके बाद नगर परिषद ने जलाशयों की सुध ली है।

लापरवाही से हो रहे निर्माण

शहर में कई स्थानों पर तालाबों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। जहां एक ओर इन तालाबों का पानी शहर की जलवायु और पर्यावरण के लिए आवश्यक था। वहीं दूसरी ओर उन्हें भरने के लिए मिट्टी डालकर अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इससे न केवल पानी की समस्या बढ़ी है, बल्कि शहर में पानी निकास की संभावना भी गहरी हो गई है।

भू-रूपांतरण तक नहीं

टोंक शहर में दर्जनों कॉलोनियां ऐसी है जो नियमों के विरुद्ध है। इनमें से 10 कॉलोनियों पर कार्रवाई के लिए तो नगर परिषद ने उच्चाधिकारियों तक को रिपोर्ट कर दी है। दरअसल कॉलोनाइजर कई जगह तो भू-रूपांतरण तक नहीं करा रहे हैं। सीधे ही जमीन की रजिस्ट्री कराकर उसमें कॉलोनी काट रहे हैं।

कई जगह भू-रूपांतरण तो करा लिया गया। लेकिन रेरा समेत अन्य नियमों की पालना नहीं हुई है। नगर परिषद ने वर्ष 2017 के बाद से अब तक एक भी कॉलोनी को रेरा के तहत पंजीयन पर अनुमोदन नहीं किया है। यह सरकार के आदेश के पालना में गंभीर स्थिति है।