
अनदेखी का आलम: वन विभाग की भूमि का घटा रहा रकबा, पुराने निशान छोडकऱ खोदी दी नींव
अनदेखी का आलम: वन विभाग की भूमि का घटा रहा रकबा, पुराने निशान छोडकऱ खोदी दी नींव
वन क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए टोंक के वन विभाग की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन सोहेला वन नाका क्षेत्र में वन भूमि का रकबा घट रहा है। इसका कारण है कि यहां चलने वाले सुरक्षा दीवार निर्माण से पहले खोदी गई नींव में काफी जगह छोड़ दी गई है।
ऐसे में वन क्षेत्र का रकबा कम हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सोहेला वन नाका व दादिया मोटूका बीट में वन विभाग सुरक्षा दीवार करीब 1500 मीटर बनाने को लेकर लाखों रुपए स्वीकृत किए हैं। अब इसकी नींव खोदना शुरू किया गया है। लेकिन इसमें करीब 150 फीट वन विभाग की ओर से जमीन छोड़ी जा रही है। इससे वन क्षेत्र घट रहा है।
इसका सीधा समीप के खेतों में होगा। वन विभाग की ओर से पुरानी टास (स्तंभ, मंदिर, पाल, कुआं, तालाब, मिनारें) को छोडकऱ नए निर्मित कुओं की टास लगाकर नाप किया है। इसमें करीब 150 फीट वन विभाग की ओर से जगह छोड़ी जा रही है। जबकि वन विभाग के सर्वे 1962 में टास व दोबारा सर्वे में उक्त जमीन राजस्व टीम वन विभाग अजमेर की ओर से करवाया गया, जिसमें उक्त वन भूमि पर सीमेंट मुडिया बनाई गई।
लेकिन वर्तमान में सीधी लाइन मिलाकर व टास चेन्ज कर 150 फीट भूमि छोड़ कर सुरक्षा दीवार की नींव खुदाई शुरू कर दिया गया। इसमें ग्रामीणों का आरोप है कि मुडिया खुर्द-बुर्द करवा दी गई है।
विभाग ने अमीन सहायक वनपाल को लगा रखा है, जो क्षेत्रीय व्यक्ति होने के कारण जिले में कई जगह वन भूमि के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है। सोहेला वन नाका क्षेत्र में कई जगह मुडियों को खुर्द-बुर्द करवा दिया है। जो अभी मौके पर ही मौजूद नहीं है।
चार महीने पहले भी हुई थी माप
लुनेरा व दादिया वन क्षेत्र में भी प्लांटेशन बनाया गया, जिसमें करीब 4 महीने पहले दोबारा भूमि नाप करके वन क्षेत्र में लिया है। वहीं भी ऐसे ही जमीन छोड़ दी गई थी।
लेकिन तब विभाग की ओर से छेड़छाड़ करने वाले कर्मचारियों व अमीन पर कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग की ओर से तुरंत प्रभाव से क्षेत्रीय कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में पुराने मुडियो के लिए गए जीपीएस के आधार पर पुराने स्तंभ मुडियों की गिनती करवाकर वन विभाग का रकबा बचाया सकता है।
यह बोले रेंजर
सोहेला वन क्षेत्र में सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है। लेकिन इसमें जमीन छोडऩे की जानकारी नहीं है। इसकी दोबारा माप कराई जाएगी। ताकि वन क्षेत्र को नुकसान नहीं हो।
- जोगेन्द्र सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी टोंक
Published on:
08 Nov 2023 09:02 pm

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