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उदयपुर. एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और जोधपुर की एनसीबी टीम ने उदयपुर और राजसमंद के बीच देलवाड़ा के पास बड़ी कार्रवाई की है। यहां गेहूं की फसल के बीच गांजे की बड़ी खेती पकड़ी गई, जिसकी बाजार कीमत करीब 10 करोड़ बताई गई है। आरोपी गांजे के पैकेट बनाकर बेचता मिला। सामने आया कि यहां से मेवाड़-मारवाड़ के कई क्षेत्रों में गांजे की आपूर्ति की जा रही थी।
एएनटीएफ आईजी विकास कुमार ने बताया कि देलवाड़ा-कैलाशपुरी रोड पर स्थित एक 5 स्टार होटल के पीछे पहाड़ी पर 6 बीघा जमीन पर टीम पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर गांजे की खेती होना पाया गया। मौके से गांजे के 5 हजार 860 पौधे बरामद किए गए। मामले में आरोपी बुजुर्ग राजसमंद खमनोर के रायानाल निवासी नत्थूलाल गमेती को गिरफ्तार किया गया। टीम मौके पर पहुंची तो नत्थूलाल गांजे के छोटे पैकेट बनाकर बेचने की तैयारी में था। जांच में सामने आया है कि इस जमीन के 19 खातेदार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।------
जगह ऐसी, जहां किसी की नजर ना पड़े
पहाड़ी पर ऊंची जगह होने के कारण यह खेत सड़क से नजर नहीं आता है। तस्करों ने गांजे की फसल गेहूं के खेत के बीच में उगा रखी थी। हाल ही में गेहूं की कटाई हुई तो गांजे की फसल नजर आने लगी। खेत की लोकेशन ऐसी है, जहां ड्रोन की नजर भी आसानी से नहीं पहुंचती।
ऑपरेशन का नाम भी अनूठा
एएनटीएफ आईजी विकास कुमार और एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी के नेतृत्व में चले इस ऑपरेशन को 'गांजाजुली' नाम दिया गया। नाम 'गांजाजुली' रखने के पीछे की वजह भी अनूठी है। जहां गांजा उगाया गया था, उसका आकार अंजलि जैसा है। ऐसे में गांजा और अंजलि को मिलाकर इसे 'ऑपरेशन गांजाजुली' नाम दिया।
जयपुर से मिला था इनपुट
हाल ही में जयपुर में पकड़े गए एक दलाल से पूछताछ में पता चला कि वह राजसमंद के देलवाड़ा से गांजा लेकर आता है। इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस इस खेत तक पहुंची। उदयपुर के आसपास के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तस्करों ने नशे का जो साम्राज्य खड़ा करने की कोशिश की थी, उस पर पिछले 6 महीनों में एएनटीएफ की यह सातवीं बड़ी कार्रवाई है।
Published on:
12 Apr 2026 05:55 pm
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