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Rajasthan Roadways: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूछा- कर्मचारियों को 5 महीने से क्यों नहीं दी सैलरी? 20 अप्रेल तक मांगा जवाब

Rajasthan High Court: कुछ महीने पहले कार्यालयों में काम कर रहे रोडवेज के चालकों और परिचालकों को प्रति महीने तीन हजार किमी चलने के आदेश जारी हुए। कुछ कर्मचारी विभिन्न कारणों से इस नियम को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। रोडवेज ने उन कर्मचारियों का पांच महीने से वेतन रोक दिया।
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उदयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 12 Apr 2026, 11:40 AM IST

Rajasthan High Court Seeks Reply from Roadways on Salary Delay till April 20 Employees Unpaid for 5 Months

रोडवेज 20 अप्रेल तक दे कर्मचारियों का वेतन रोकने पर जवाब (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Roadways: उदयपुर: राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) में पिछले कुछ समय से चल रहा वेतन विवाद अब कानूनी चौखट पर पहुंच गया है। रोडवेज प्रबंधन द्वारा लागू किए गए एक नए नियम के कारण प्रदेश के लगभग 150 से 200 कर्मचारियों का पिछले पांच महीनों से वेतन रुका हुआ है।

बता दें कि इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए रोडवेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। साथ ही 20 अप्रेल तक अपना स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया है।

क्या है विवाद की मुख्य जड़?

कुछ महीने पहले रोडवेज प्रबंधन ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत कार्यालयों में कार्यरत चालकों और परिचालकों के लिए प्रति महीने 3,000 किलोमीटर बस चलाना अनिवार्य कर दिया गया था।

प्रबंधन का तर्क था कि इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी, लेकिन धरातल पर कई कर्मचारी विभिन्न तकनीकी और व्यक्तिगत कारणों से इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। नियम पूरा न होने की सूरत में रोडवेज ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए इन कर्मचारियों का वेतन पांच माह से रोक रखा है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फेडरेशन के महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने इस नियम को 'प्रबंधन की हठधर्मिता' करार दिया है। फेडरेशन का तर्क है कि श्रम विभाग के स्थाई आदेशों में संशोधन किए बिना इस तरह का नया नियम लागू करना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।

मेडिकल सर्टिफिकेट का विवाद

प्रबंधन केवल जयपुर के एसएमएस अस्पताल के मेडिकल सर्टिफिकेट को ही स्वीकार कर रहा है। अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रमाणपत्रों को अमान्य किया जा रहा है, जिससे गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों के लिए जयपुर तक का सफर करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही

वेतन रोके जाने के खिलाफ फेडरेशन ने 4 अप्रैल को जयपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले पर 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान, निगम के अधिवक्ता राजपाल धनकड़ की उपस्थिति में न्यायालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन को नोटिस जारी किया।

अब रोडवेज प्रशासन को यह बताना होगा कि किस आधार पर और किन नियमों के तहत कर्मचारियों का वेतन पांच महीनों से रोका गया है। इस विवाद ने प्रदेशभर के रोडवेज कर्मियों में असंतोष पैदा कर दिया है। क्योंकि वेतन न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।