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Patrika Campaign : बेटियों की श‍िक्षा की यूं सामने आई हकीकत, अकेले उदयपुर में 14 से 18 वर्ष की 28 प्रतिशत बच्‍िचयां हैंं श‍िक्षा से वंचित

एन्युअल स्टेटस ऑफ एज्यूकेशन रिपोर्ट 2017 ने राजस्थान के एकमात्र जिले उदयपुर को वर्ष 2017 में शामिल किया है।

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भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . उदयपुर जिला, जहां बेटियों का गौरवमयी इतिहास रहा है, उसी जिले में बेटियां यदि ज्ञान की ज्योत से दूर खुद को घर के आंगन में ही समेट कर रखेंगी तो आने वाली पीढ़ी को शिक्षा कैसे मिलेगी। हाल में जारी असर की रिपोर्ट तो कुछ यही कहती है। असर (एन्युअल स्टेटस ऑफ एज्यूकेशन रिपोर्ट 2017) ने राजस्थान के एकमात्र जिले उदयपुर को वर्ष 2017 में शामिल किया है। असर ने अपनी इस रिपोर्ट में जिले के 60 गांवों के 920 घरों की पृष्टभूमि को खंंगाला, तो सामने आई चौंकाने वाली हकीकत। 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की 28 प्रतिशत बेटियां किसी भी स्कूल या कहीं पर भी नामांकित नहीं हैं। अधिकांश किसी स्कूल की सीढ़ी तक नहीं चढ़ी, बस घर के काम और चूल्हे-चौके में अपना जीवन फूंक रही हैं। इनमें से 14.7 प्रतिशत बेटियों ने 8 वर्ष तक पढ़ाई की है, जबकि 13.3 प्रतिशत बेटियों ने कहीं शिक्षा प्राप्त नहीं की है।

देश में इस आयु वर्ग में पहली बार अपनी तरह का यह विशेष सर्वे हुआ है। इस रिपोर्ट में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग में चार बिन्दुओं पर फोकस किया गया है। गतिविधि, क्षमता, बुनियादी पढ़ाई और सामान्य संक्रियाओं से जुड़े प्रश्न। असर 2017 बियॉन्ड बेसिक रिपोर्ट का नई दिल्ली में 16 जनवइस सर्वे में कार्य किया है। री 2018 को लोकार्पण किया गया। यह बारहवीं वार्षिक रिपोर्ट है। 2005 से प्रति वर्ष एन्युअल स्टेटस ऑफ एज्यूकेशन रिपोर्ट ग्रामीण भारत के बच्चों के स्कूल में नामांकन व बुनियादी पढ़ाई व क्षमताओं के बारे में बताता है।
उदयपुर जिले के 60 गांवों के 920 घरों में 14 से 18 वषु आयु वर्ग के 1071 युवक-युवतियों की यह विशेष रिपोर्ट तैयार की गई। विद्याभवन सोसायटी के तीन कॉलेजों (विद्या भवन जीएस टीचर्स कॉलेज, विद्याभवन गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ एज्यूकेशन स्टडिज और विद्याभवन रूरल इंस्टीट्यूट)के 100 छात्रों ने असर के साथ जुडकऱ कार्य किया है। यह सर्वे देश के 24 राज्यों के 28 जिलों में किया गया है।

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यह पहलू हुए उजागर
(14-18 वर्ष आयु) (उदयपुर)
22.7त्न लडक़े- लड़किया जो कहीं पर नामांकित नहीं।
96.8त्न युवा किसी वाकेशनल या अन्य कोर्स को नहीं कर रहे।
71.0त्न युवा कक्षा दो के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं, 29 प्रतिशत नहीं।
57.0त्न बच्चे जो दो अंक के घटाव के सवाल कर सकते हैं, 43 प्रतिशत नहीं।
38.0त्न बच्चे जो अंग्रेजी में सामान्य वाक्य पढ़ सकते हैं, 62 प्रतिशत नहीं।
वित्तीय साक्षरता
(ये प्रश्न उन्हीं युवाओं से पूछे गए जो कम से कम घटाव के सवाल कर सकते थे।)
50.1त्न युवा जो बजट से जुड़े निर्णय ले सकते हैं।
55.0त्न युवा जो खरीददारी से जुड़े निर्णय ले सकते हैं।
26.0त्न युवा जो छूट की सही गणना कर सकते हैं, 73 प्रतिशत नहीं।
11.4त्न युवा जो बैंकों में ऋण व ब्याज के भुगतान की सही गणना कर सकते हैं, जबकि 88.6 प्रतिशत नहीं।
35त्न नहीं गिन पाए नोट, तो कई घड़ी देखना तक नहीं जानते
युवाओं को नोट देकर राशि पूछी गई, तो 65 प्रतिशत ने सहीं आंकड़ा बता दिया, जबकि 35 प्रतिशत नहीं। इसी प्रकार 49.8 प्रतिशत युवाओं ने किलोग्राम में सही वजन जोडकऱ बताया, 50.2 प्रतिशत नहीं बता सके। आश्चर्य ये है कि 48.6 प्रतिशत युवा जो घड़ी देखकर समय बता पाए, जबकि 51..4 प्रतिशत को घड़ी देखना नहीं आया।