
आखिर इनके अंदर कौन झांके ...
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. प्राइवेट हॉस्पिटलों में एक से एक शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि या एकल खिड़की नहीं है, जहां लोग सीधे तौर पर शिकायत करें और इसका समाधान हो जाए। कोरोना महामारी शुरू होने के साथ ही सरकार ने निर्देशित किया था, कि ऐसी व्यवस्था हो कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समस्या पर सीधे संपर्क कर सकेंगे। उदयपुर में मेडिकल कॉलेजों से लेकर कई छोटे बड़े हॉस्पिटल हैं। इसलिए यहां तो इस तरह की व्यवस्था की बेहद ज्यादा जरूरत हैं।
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ज्यादातार पहुंच रही हैं सीधे जिला प्रशासन तक चिकित्सा विभाग के पास अलग से कोई कम्प्लेन सेल नहीं होने से लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर जिला प्रशासन तक पहुंच रहे हैं। यहां भी इन लोगों की दिक्कतों का तत्काल समाधान नहीं होता। ऐसे में उन्हें कई प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ती है। विभाग को चाहिए कि वह अलग से एक हेल्पलाइन नम्बर जरूर जारी कर दें, ताकि कोई भी व्यक्ति सीधे इससे संपर्क कर अपनी समस्या वहां बता सके, और इसे तय समय में हल किया जा सके। विभाग की कोई कम्प्लेन मेल आईडी भी जारी करने चाहिए ताकि व्यक्ति ऑनलाइन समस्या भेज सके।
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इस तरह की आ रही है समस्याएं
- उपचार में लापरवाही
- उपचार में ज्यादा शुल्क लेने
- आपसी विवाद
- कई बार चिकित्सकों व स्टाफकर्मियों द्वारा दुव्र्यवहार
- प्रबन्धन द्वारा विभिन्न प्रकार के दबाव
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कई बार उलट भी
- कई बार निजी चिकित्सालयों में भी किसी मरीज के परिजन हंगामा या जानबूझकर हुडदंग मचाते हैं। कई बार उपचार में लापरवाही का बेवजह आरोप लगाकर उल्टी सीधी मांगे भी रखते हैं। ऐसे में ये जरूरी है कि एक प्लेटफार्म हो ताकि वहां पर दोनों पक्षों पर निर्णय हो सके। यह स्पष्ट हो सके कि कौन सही है और कौन गलत।
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कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत चिकित्सा विभाग को लिखित में प्रस्तुत कर सकते हैं। जो भी इस तरह के मामले विभाग के पास आ रहे हैं, उनका जल्द से जल्द निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ उदयपुर
Updated on:
08 Nov 2020 08:12 am
Published on:
08 Nov 2020 08:12 am
