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74 वर्ग किमी क्षेत्र में किया जा रहा विकसित, 15 करोड़ से संरक्षण, निगरानी और ईको-टूरिज्म के हो रहे विकास कार्य
उदयपुर. शहर के पास अरावली की पहाड़ियों में फैला अमरखजी क्षेत्र अब तेंदुओं के संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। करीब 74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित अमरख लेपर्ड कंज़र्वेशन रिजर्व को विकसित करने के लिए वन विभाग ने काम तेज कर दिए हैं। इस परियोजना के तहत डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से करीब 15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, इनसे क्षेत्र में संरक्षण, निगरानी, बुनियादी ढांचे और ईको-टूरिज्म से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।
रिजर्व क्षेत्र में पेट्रोलिंग ट्रैक, वॉच टावर, बाउंड्री वॉल, मृदा एवं जल संरक्षण कार्य और वन्यजीव निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर कई स्थानों पर ट्रैक और सुविधाओं का निर्माण शुरू हो चुका है। यह क्षेत्र विकसित होने के बाद पर्यटकों को अरावली की घाटियों, चट्टानी पहाड़ियों और प्राकृतिक वन क्षेत्र के बीच नया ईको-टूरिज्म अनुभव देगा।--
कलक्टर ने अधिकारियों के साथ किया निरीक्षण
इस परियोजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए जिला कलक्टर नमित मेहता और यूडीए आयुक्त राहुल जैन ने वन विभाग और यूडीए के अधिकारियों के साथ क्षेत्र का दौरा कर प्रस्तावित विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उप वन संरक्षक (उदयपुर उत्तर) अजय चित्तौड़ा और सहायक वन संरक्षक राजेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने क्षेत्र में बनाए जा रहे पेट्रोलिंग ट्रैक और संरक्षण कार्यों का अवलोकन करते हुए परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।--
उदयसागर पाल बनेगी मुख्य प्रवेशद्वार
वन विभाग की ओर से उदयसागर नहर क्षेत्र पर कॉज-वे निर्माण का प्रस्ताव रखा गया, इससे अमरख लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व के प्रवेशद्वार तक पहुंच आसान होगी। इसे आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में तैयार कर अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना है।
जैव विविधता से समृद्ध
अमरख क्षेत्र अरावली की पहाड़ियों, झाड़ियों और प्राकृतिक वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। यहां सालर, कड़ाया और गोधल जैसे वृक्षों के घने समूह पाए जाते हैं, जो कई वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास हैं। इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से तेंदुआ, लकड़बग्घा, भालू, साही कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। वन विभाग के अनुसार कई बार कैमरा ट्रैप में तेंदुओं की तस्वीरें भी सामने आई है।--
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की पहलउदयपुर शहर के आसपास कई बार तेंदुओं की आवाजाही की घटनाएं सामने आती रही हैं। शहर के विस्तार के कारण जंगल और आबादी के बीच दूरी कम होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ती है। ऐसे में अमरख क्षेत्र को संरक्षण रिजर्व के रूप में विकसित करने से तेंदुओं के लिए सुरक्षित क्षेत्र तैयार होगा और शहर में उनके भटककर आने की घटनाओं में कमी आएगी।
ईको-टूरिज्म से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
अमरख लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व विकसित होने के बाद यहां नियंत्रित ईको-टूरिज्म शुरू करने की योजना भी है। इससे पर्यटकों को अरावली के प्राकृतिक जंगल, घाटियों और वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए गाइड, पर्यटन सेवाओं और छोटे व्यवसायों के रूप में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।---
15 करोड़ से होंगे ये प्रमुख कार्य
- जंगल के भीतर पेट्रोलिंग ट्रैक का निर्माण- वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल- निगरानी के लिए वॉच टावर
- मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य- वन्यजीवों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था
- जंगल में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे- नियमित गश्त और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी
- अवैध शिकार और गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जाएगा- आसपास के ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा
वन्यजीवों के लिए भी होगा संरक्षित क्षेत्र
- तेंदुओं को स्थायी सुरक्षित आवास मिलेगा- शहर की ओर उनके भटकने की घटनाएं कम हो सकती हैं- वन्यजीव संरक्षण को संगठित दिशा मिलेगी- निगरानी और सुरक्षा के विशेष इंतजाम- वन विभाग इस क्षेत्र में निगरानी मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रहा है।
ईको-टूरिज्म से रोजगार की संभावना- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे- शहर में नेचर टूरिज्म का नया केंद्र विकसित हो सकता है
Published on:
29 Mar 2026 05:53 pm
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