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उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय का मामला ….हर ओर शोर, आखिर कौन है ‘चोर’

अधीक्षक कार्यालय से चोरी हुए अलमारियों के कपाट

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Case of Maharana Bhopal Hospital of Udaipur

उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में मंत्रालयिक कार्मिकों के बीच इन दिनों एक ‘चोर’ को लेकर ‘शोर’ मचा हुआ है। आखिर कौन है, जिसने अधीक्षक कार्यालय की दीवारों में लगी लकड़ी अलमारियां सहित अन्य सामान को स्टोर में पहुंचाने के दौरान गायब कर गया। ताज्जूब इस बात का है कि गायब हुई अलमारियों को लेकर पीडब्ल्यूडी, ठेकेदार, अस्पताल के स्टोर कीपर के जिम्मेदार सभी अनजान हैं। हालांकि दबी जुबान में मंत्रालयिककर्मियों में यह चर्चा जरूर है कि उनमें से एक ने यह कारगुजारी की है, लेकिन कोई खुलकर बताने को तैयार नहीं है।

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इधर, गायब हुई अलमारियां, बिजली के स्वीच, एमसीबी एवं अन्य सामानों को लेकर पत्रिका की पड़ताल पर पीडब्ल्यूडी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और ठेका एजेंसी गोयल कन्सट्रक्शन के प्रतिनिधि को बुलाकर वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर अलमारियों सहित अन्य आवश्यक सामग्री का हिसाब देने के निर्देश दिए है। अब ठेका एजेंसी प्रतिनिधि बोल रहा है कि उसने अलमारियों को शामिल नहीं किया था।

करीब 15 कपाट गायब
नई ओपीडी बिल्डिंग निर्माण को लेकर खाली किए गए अधीक्षक कार्यालय के अधीक्षक कक्ष में दो, उप अधीक्षक कार्यालय में दो, सामान्य शाखा में एक, कार्यालय अधीक्षक के पूर्व में स्थित कक्ष के पीछे गलियारे के कक्ष में एक अलमारी थी। कमोबेश यही स्थित प्रथम एवं निचले तल पर बने अन्य कक्षों में भी थी। १५ से अधिक अलमारियों में एक के भी दरवाजे न तो ठेकेदार प्रतिनिधि के रिकॉर्ड में है और ना ही ये चिकित्सालय के स्टोर में और पीडब्ल्यूडी गेंग हट के स्टॉक में हैं। पत्रिका की पड़ताल में आया कि राजकीय सेवारत चिकित्सालय के चौकीदार के साथ संविदा कार्मिक ने फर्नीचर, डस्ट बिन, बाल्टी, गुलदस्ते, गमले और अलमारियों को विवि मार्ग स्थित निजी मकान में पहुंचाया था।

कहता है नियम
नियमों के तहत भवन को खाली कराते समय दीवार एवं उसमें लगे प्रत्येक सामान पर पीब्डल्यूडी का हक होता है। निर्माण एजेंसी के तौर पर पीडब्ल्यूडी संबंधित सामानों को एकत्र करने के बाद नीलामी निकालकर संबंधित सामान की बोली तय करती है। यह राशि राजकोष में जमा होती है। दूसरी ओर चिकित्सालय का स्टोर पुराने सामानों एवं अधीक्षक कार्यालय के भंगार के लिए खोला हुआ तो है, परंतु जमा किए जा रहे भंगार का हिसाब स्टोर कीपर के पास नहीं है।

ठेकेदार से वसूली
हमारे पास वीडियोग्राफी एवं फुटेज हैं। इसमें तोडऩे से पहले के कक्षों की पूरा ढांचा है। इससे दीवार में बनी अलमारियों के कपाटों की गिनती कर ठेकेदार से सामान की गिनती कराएंगे। सामान नहीं होने पर ठेकेदार से वसूली की जाएगी। पहले हमारे स्तर पर गिनती पूरी हो जाए। तभी सही जवाब देने में सही रहेगा।
आर.के मूंदड़ा, सहायक अभियंता, एमबी हॉस्पिटल गेंगहट (पीडब्ल्यूडी)