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उदयपुर के मीरा गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं का जोरदार प्रदर्शन, प्राचार्य को कमरे में किया बंद

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना था कि हाल ही में घोषित बीए और बीएससी द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के परिणामों में गंभीर खामियां हैं। बड़ी संख्या में छात्राओं को फेल दिखाया गया है।

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Meera Girls College protest

मीरा गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं का प्रदर्शन (फोटो-पत्रिका)

उदयपुर। राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में बुधवार को छात्राओं ने परीक्षा परिणामों में कथित अनियमितताओं और स्कूटी वितरण में देरी को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेतृत्व में सैकड़ों छात्राएं कॉलेज परिसर में एकत्र हुईं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि छात्राओं ने प्राचार्य कक्ष के बाहर ताला लगा दिया, जबकि प्राचार्य अंदर मौजूद थे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बातचीत के बाद ताला खुलवाया गया, लेकिन छात्राएं धरने पर बैठ गईं और अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।

परीक्षा परिणामों में धांधली का आरोप

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना था कि हाल ही में घोषित बीए और बीएससी द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के परिणामों में गंभीर खामियां हैं। बड़ी संख्या में छात्राओं को फेल दिखाया गया है, जबकि उनका दावा है कि उन्होंने परीक्षा ठीक से दी थी। उनका आरोप है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे कई मेधावी छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

एक-दूसरे का बहाना कर झाड़ रहे पल्ला

छात्र संघ अध्यक्ष किरण वैष्णव ने कहा कि कई विषयों में बिना उचित कारण बताए छात्राओं को फेल कर दिया गया, जिससे संदेह पैदा होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिससे छात्राओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

उपस्थित छात्राओं को दिखाया अनुपस्थित

ABVP की छात्रा सुमन कुंवर ने कहा कि कई बीए छात्राओं को परीक्षा में बैठने के बावजूद अनुपस्थित दिखा दिया गया है। इसके अलावा, हर साल बढ़ती फीस और रिवैल्यूएशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्राओं का कहना है कि यह व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

काॉलेज प्राचार्य ने आरोपों को निराधारा बताया

दूसरी ओर, कॉलेज के प्राचार्य दीपक माहेश्वरी ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा संचालन और मूल्यांकन का कार्य मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है, इसलिए कॉलेज स्तर पर परिणामों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्राओं की शिकायतें लिखित रूप में लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाई जाएंगी और समाधान का प्रयास किया जाएगा।

स्कूटी वितरण भी बड़ा मामला

छात्राएं अब उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच, निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली और वर्षों से लंबित स्कूटी वितरण को शीघ्र पूरा करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। दरअसल, कई सालों से स्कूटी खड़ी हैं, जिन्हें वितरित नहीं किया जा रहा। धूप में खड़ी स्कूटियों की सीटें फट गई हैं और वे पंचर हो गई हैं।