
पत्नी को विधि सम्मत छोड़े बिना ही पति को दूसरी युवती से विवाह रचाना उस समय भारी पड़ गया, जब पहली पत्नी अदालत में फरियाद कर आनन-फानन में शादी रोकने का फरमान ले आई। इस युवक का चार दिन के बाद ही दूसरा विवाह होना तय था, उसकी कुमकुम पत्रिकाएं भी बंट चुकी थी और 6 मई एक वाटिका में आशीर्वाद समारोह होना तय था।
शादी रुकवाने के लिए भूपालपुरा निवासी शालिनी उर्फ चारूल पत्नी भूपेन्द्र श्रीमाली ने जिला विधिक प्राधिकरण में बुधवार को ही प्रार्थना-पत्र पेश किया था। प्राधिकरण के अध्यक्ष देवेन्द्र कच्छवाह के निर्देश पर सचिव प्रमोद बसंल ने इसे गंभीरता से लेते हुए महिला विधिक क्लिनिक प्रभारी रितू मेहता को निर्देश दिए। अधिवक्ता मेहता ने पारिवारिक न्यायालय में दूसरे विवाह पर अंतरिम निषेधाज्ञा दिलाए जाने वाले बाबत प्रार्थना पत्र पेश किया।
साथ ही उन्होंने शादी का कार्ड भी लगवाया। न्यायालय ने भी हाथोंहाथ मामले की जांच करवाकर आरोपितों के खिलाफ समन जारी किए। पति भूपेन्द्र श्रीमाली व उसकी मां शांतादेवी से समन भी तामिल हो गए। गुरुवार को न्यायालय ने विवाह पर रोक लगाते हुए अगली पेशी 23 मई तय की है।
पांच वर्ष पहले रचाया था पहला विवाह
पीडि़ता शालिनी ने परिवाद में बताया कि उसका विवाह 18 फरवरी 2012 को भूपेन्द्र से हुआ था। एक वर्ष के बाद ही मनमुटाव हो गया। वर्ष 2014 में उसने महिला थाने में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करवाया था तथा भरण-पोषण का अलग से दावा पेश किया। आरोपित ने समझौता करते हुए मामले उठवा कर उसे अपने साथ ले गया। पीडि़ता का कहना है कि वर्ष 2015 में भूपेन्द्र ने उसके साथ मारपीट कर उसे निकाल लिया। मारपीट में उसका गर्भ भी गिर गया। इस संबंध में दुबारा महिला थाने में रिपोर्ट दी तथा भरण पोषण का वाद दायर किया। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
इस बीच, पीडि़ता को पति भूपेन्द्र द्वारा आयड़ चारभुजा मंदिर वाली गली में निवासरत मीनाक्षी पुत्री प्रेमशंकर शर्मा से विवाह करने की जानकारी मिली। विवाह 6 मई को ही होने पर वह शादी का कार्ड लेकर न्यायालय में पेश हो गए। न्यायालय ने विवाह पर रोक लगा दी।
Published on:
05 May 2017 10:31 am
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