
udaipur
उदयपुर।शोभागपुरा चौराहे के पास बन रही नामी व्यावसायिक इमारत रॉयल राजविलास के निर्माण और भूमि नियमन के मामले में देव भूमि को खुर्द-बुर्द कर दिया गया। राजस्व रिकॉर्ड में नृसिंहद्वारा मीठारामजी मंदिर के नाम पर भूमि दर्ज होने के बावजूद नगर विकास प्रन्यास ने यहां होटल, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग मॉल और बड़ी संख्या में आवासीय फ्लेट्स बनाने की मंजूरी दे डाली। इस जमीन की वर्ष 2009 से हाईकोर्ट में याचिका चल रही है, जिसमें यूआईटी भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
रानी रोड निवासी अशोकसिंह चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका (8136/2009 ) दायर की हुई है। इसमें राजस्व मण्डल अजमेर, आरएए उदयपुर, उप जिला कलक्टर कार्यालय गिर्वा, मगना पुत्र ओंकार डांगी, शांतिलाल मेहता, महेशचंद्र शर्मा, यूआईटी, नृसिंहद्वारा मीठारामजी मंदिर के महंत रामचरणदास, तहसीलदार गिर्वा, मेसर्स देहलीवाला रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड जरिए विमलकुमार जैन, उदयपुर ट्रेजर मार्केट सिटी प्राइवेट लिमिटेड बाद में उदयपुर एंटरटेनमेंट वल्र्ड प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को पार्टी बनाया गया था। प्रकरण में यूआईटी को हाईकोर्ट से नोटिस भी दिया गया, पर उसने प्रोजेक्ट का पट्टा जारी कर दिया। अब याचिकाकर्ता की ओर से भेजे गए नोटिस में यूआईटी से आपत्ति जताई गई है कि याचिका विचाराधीन रहते उसने मिलीभगत कर देव भूमि को खुर्द-बुर्द किया और प्रोजेक्ट को मंजूरी दे डाली।
एसडीओ में हारे, आरएए में जीते
याचिकाकर्ता ने बताया कि शोभागपुरा के आराजी नंबर 964 से 968, 973 से 975, 981 से 989, 994 से 998 कुल किता 21 रकबा 3.5700 हैक्टेयर भूमि राजस्व रिकॉर्ड में देवता के नाम पर दर्ज है। मगना ने इस जमीन को मंदिर पुजारी से मिलीभगत कर व धर्मपाल डेम्बला, शांतिलाल मेहता, महेश शर्मा के साथ मिलकर एसडीएम गिर्वा की अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा का दावा पेश कर खातेदारी का हक जता दिया। अदालत ने मगना के पक्ष में आदेश दे दिया। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने राजस्व अपील अधिकारी की अदालत में चुनौती दी। यहां एसडीएम अदालत का निर्णय खारिज कर दिया गया। इसकी पालना में भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में मीठारामजी मंदिर के नाम पर दर्ज कर लिया गया।
फिर हाईकोर्ट पहुंचा जमीन का मामला
मगना ने इस आदेश को राजस्व मण्डल अजमेर में चुनौती दी। इस पर मण्डल ने मगना की अपील स्वीकार कर ली, लेकिन इस अपील के खिलाफ अशोकसिंह ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी, जो विचाराधीन है। इस रिट के विचाराधीन रहते यूआईटी ने उदयपुर एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को शोभागपुरा में आराजी नंबर 947 से 957, 962, 963, 969 से 972, 1392/947 के भू-भाग पर व्यावसायिक भूखंड संख्या-2 का आवंटन कर 17 दिसम्बर 2009 को संशोधित आवंटन आदेश जारी कर दिया। इसके बाद 14 जनवरी 2010 को व्यावसायिक मल्टीप्लेक्स, होटल, सिनेमा, शॉपिंग मॉल के लिए कुल 2 लाख 51 हजार 385 वर्गफीट भूमि का व्यावसायिक पट्टा जारी कर दिया।
मामले की जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई
यूआईटी व्यावसायिक इमारत के निर्माण की मंजूरी दे चुकी है। देव भूमि का क्या प्रकरण है और जमीन सड़क आदि में कैसे खुर्द-बुर्द हुई इसकी यूआईटी से रिपोर्ट लेकर उचित कार्रवाई होगी।रोहित गुप्ता, अध्यक्ष, यूआईटी
विवादित जमीन को नहीं छेड़ा
विवादित जमीन को कंपनी ने नहीं छेड़ा है और हमें नोटिस प्राप्त हुआ है। इसमें बताया गया कि सड़कें आदि में मंदिर की जमीन चली गई है, लेकिन यह जमीनें कंपनी की खरीदी गई खातेदारी की जमीनें हैं। रॉयल राजविलास के पीछे विवादित जमीन खुली पड़ी है, जिसका केस चल रहा है। इस जमीन और हमारी कंपनी के आराजी नंबर अलग-अलग हैं। विवादित जमीन की यूआईटी से जांच करवाई थी। सब काम नियमों के तहत मिला। कंपनी में दो जनों ने खातेदारी और बिना खातेदारी वाली जमीन खरीदी थी। बिना खातेदारी वाली जमीन मंदिर की है, जिसका केस चल रहा है। अरविंद बड़ाला, निदेशक, उदयपुर एंटरटेनमेंट वल्र्ड प्रालि
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