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देश में आर्थिक असमानता: ज्यादातर पैसा अमीरों की जेब में, गरीब और गरीब होता जा रहा है, मिलकर हालात सुधारना जरूरी

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी से बातचीत पत्रिका से बोले- गांवों में दो दशक से ज्यादा कुछ नहीं बदला

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देश में आर्थिक असमानता: ज्यादातर पैसा अमीरों की जेब में, गरीब और गरीब होता जा रहा है, मिलकर हालात सुधारना जरूरी

देश में आर्थिक असमानता: ज्यादातर पैसा अमीरों की जेब में, गरीब और गरीब होता जा रहा है, मिलकर हालात सुधारना जरूरी

नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय अमरीकी अभिजीत बनर्जी ने कहा कि भारत अभी विश्व स्तर पर आर्थिक दौड़ में बहुत पीछे है। इसका मूल कारण देश में आर्थिक असमानता होना है। यहां ज्यादातर धनराशि अमीरों की जेब में है, तो गरीब और गरीब होता जा रहा है।उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत की आर्थिक िस्थति को सुधरने में समय लगेगा। देश में जो आर्थिक असमानता है, उसे दूर करने के लिए सब को मिलकर कुछ करना होगा तभी इसमें सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां वर्ल्ड टेक्सेशन व स्टेट टेक्सेशन नहीं है। यदि इसकी शुरुआत होती है तो असमानता पर चोट होगी। सेवा मंदिर की ओर से विद्या भवन ऑडिटोरियम में यह आयोजन किया गया।

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दो दशक से गांवों में खास बदलाव नहीं: पसर रहे है टीबी व मलेरिया

बनर्जी ने कहा कि दो दशक से गांवों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। दो दशक पहले उन्होंने उदयपुर के गांवों में जाकर रिसर्च की थी। हालात जस के तस है। मामूली बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि जिले के गांवों में दो दिन पहले जाकर देखा तो सामने आया कि गांवों में टीबी और मलेरिया फैल रहा है। चिकित्सा के हालात चिंताजनक हैं। एनिमिया की शिकायत है तो महिलाओं के लिए प्रसव की माकूल व्यवस्थाएं नहीं है। गांवों में घर जरूर पक्के जरूर बने हैं, लेकिन समस्याएं अभी बनी हुई है। गांव के लोगों में डायबिटिज, हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं भी अब बढ़ने लगी है।-

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बनर्जी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कहा कि वे लोगों को अपने साथ जोड़ने निकले हैं। इससे विपक्ष की भूमिका मजबूत होगी और राजनीतिक प्रतिस्पदधाZ का माहौल बनेगा।

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खाने के लिए विरोध किया तो जेल में भी वही खाना पड़ाबनर्जी जब जेनएयू में पढ़ रहे थे तो उन्होंने हॉस्टल में बेहतर खाना नहीं मिलने को लेकर दोस्तों के साथ विरोध जताया था, इस पर उन्हें पुलिस पकड़कर ले गई और तिहाड़ जेल में बंद कर दिया। हालात ये थे कि खाने के लिए विरोध किया और जेल में भी ऐसा ही खाना मिला।

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गांवों में लोगों के साथ खेली गेर

बनर्जी दो दिन से उदयपुर में हैं। उन्होंने कई गांवों में दौरा किया और अपनी टीम के साथ वहां गेर खेलकर आनन्द लिया।