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अगर आप भी बच्चों के एग्जाम को लेकर स्ट्रेस में आ रहे हैं तो स्ट्रेस ना लें.. पहले पढ़ लें ये खबर..

तनाव का पेरेंट्स के द्वारा प्रभावशाली प्रबंधन अत्यंत जरूरी है क्योंकि बार-बार या लगातार बने रहने से यह पूरे परिवार में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर देता है जिसका असर पेरेंट्स पर तो होता ही है

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केस 1 : कविता (परिवर्तित नाम) बारहवीं कक्षा की छात्रा है, उसका बोर्ड परीक्षा के दौरान तनाव बढ़ने लगा और भोजन कर पाना भी कठिन हो गया। उसे लगातार सिर दर्द हो रहा था और अक्सर चिढ़चिढ़ेपन के साथ ही कमजोरी महसूस होती थी। हालांकि वह परीक्षा की तैयारी में लगी थी, लेकिन मन में नकारात्मक विचार उसे परेशान करते थे ‘मुझसे यह नहीं हो पाएगा’, ‘मैं फेल हो जाऊंगी, मेरे अलावा हर कोई मुझसे बहुत अच्छा कर रहा है’। ऐसे में उसका व्यवहार देख पेरेंट्स भी तनाव में आ गए।

केस 2 : प्रहर परिवर्तित नाम 10वीं बोर्ड का छात्र है। परीक्षा को लेकर अत्यधिक चिंता करने से पढ़ाई में उसका ध्यान नहीं लग पा रहा था और उसके पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही थी। उसे देखकर उसके पेरेंट्स भी तनाव में आ गए थे। अतः परीक्षा के कुछ समय पहले ही प्रहर और उसके पेरेंट्स ने मनोचिकित्सक से परामर्श लिया। साइकोथेरेपी के कुछ सेशन लेने के बाद वे अपने तनाव का प्रभावी तरीके से प्रबंधन कर रहे हैं।

एक जमाना था जब परीक्षा का तनाव या तो होता ही बहुत कम था और होता भी था तो खास तौर पर बच्चों में ही देखा जाता था, वहीं आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में तनाव महज बच्चों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पेरेंट्स को भी परीक्षा के समय में अधिक तनाव में देखा जाता है। शायद इसलिए भी क्योंकि पेरेंट्स अपने बच्चों की परीक्षा में स्वयं अधिक भागीदारी ले रहे हैं। शहर के मनोचिकित्सकों के पास एग्जाम स्ट्रेस के केसेस आ रहे हैं जिनमें बच्चे के तनाव के कारण पेरेंट्स भी तनाव में हैं। ऐसे में इस तनाव का पेरेंट्स के द्वारा प्रभावशाली प्रबंधन अत्यंत जरूरी है क्योंकि बार-बार या लगातार बने रहने से यह पूरे परिवार में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर देता है जिसका असर पेरेंट्स पर तो होता ही है और बच्चों में उनके जीवन में होने वाली मानसिक समस्याओं का एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है।

66 प्रतिशत बच्चे माता-पिता के दबाव के कारण तनाव में

मनोचिकित्सक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि कोलकाता में किए गए एक शोध में 3 सरकारी और तीन 3 स्कूलों के 11वीं एवं 12वीं कक्षा (औसत आयु: 16.72 वर्ष) के कुल 190 छात्रों का सर्वे किया गया, इसमे शैक्षणिक तनाव, पेरेंट्स के दबाव, उनकी चिंता, मानसिक स्वास्थ्य एवं विभिन्न मनो सामाजिक कारकों के बीच संबंधों की जांच की गई। लगभग दो-तिहाई (63.5%) छात्रों में शैक्षणिक दबाव के कारण तनाव, वहीं लगभग दो-तिहाई (66%) छात्रों में बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए माता-पिता से दबाव के कारण तनाव देखा गया। लगभग एक-तिहाई (32.6%) छात्रों में मनोरोग के लक्षण थे और 81.6% ने परीक्षा-संबंधी चिंता की सूचना दी। पिछले छह वर्षों में कोटा में 60 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की, इनमें से अधिकांश का कारण परीक्षा में असफलता थी। वहीं देशभर में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में स्कूल के छात्रों में आत्महत्या के मामलों में लगभग 70 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है और अकेले 2021 में सर्वाधिक 13000 आत्महत्या के मामले पाए गए।

परीक्षा के समय पेरेंट्स में होने वाले तनाव के कारण -

व्यक्तिगत कारक : पेरेंट्स में छोटी छोटी बातों पर अत्यधिक तनाव लेने की आदत जो उनमें बचपन से ही या सामाजिक परिस्थितियों से बन गई है।

सामाजिक कारक : माता-पिता अपने बच्चों की तुलना दूसरों बच्चों से करते हैं जिसके कारण शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा एवं पेरेंट्स में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है जिससे तनाव भी बढ़ जाता है।

पारिवारिक कारक : पेरेंट्स अक्सर अपने बच्चों को परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते हुए देखना चाहते हैं। उनको अपने बच्चों से अधिक अपेक्षाएं होती है जिसके कारण वो अपने बच्चों के साथ उनकी परीक्षा में अपनी अधिक भागीदारी दिखाते हैं और वही अत्यधिक होने पर उनके तनाव का कारण बन जाती है।

परीक्षा के तनाव से निपटने के लिए प्रभावी प्रबंधन :

- मनोचिकित्सक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि पेरेंट्स को सबसे पहले यह पहचानने की जरूरत है कि वह स्वयं और बच्चों पर कहीं अत्यधिक तनाव तो नहीं दे रहे और उसके बाद उन्हें स्वयं एवं बच्चों पर सही मायने में तनाव प्रबंधन को सीखने की आवश्यकता है।

- पेरेंट्स के द्वारा परीक्षा में अंकों और ग्रेड के स्थान पर पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए।- पेरेंट्स को यह भी जानने की जरुरत है कि पढ़ाई महज़ परीक्षा पास करने के लिए नहीं अपितु उस विषय को सीखने के लिए है। उस स्कूल और कक्षा में प्रवेश के शुरुआती दिनों से ही पढ़ाई, खेलकूद, खाना-पीना और सोने-जागने जैसी गतिविधियों में अनुशासन रखते हुए उस कक्षा में जो भी सीखा है, उन जीवन मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

- शिक्षा और उसके परिणामों से जुड़े विज्ञापनों से अभिभावक गुमराह ना हो और अपने बच्चों से उनकी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन करने की अपेक्षा करें।

- यदि पेरेंट्स और उनके बच्चे परीक्षा के तनाव को प्रभावी तरीके से प्रबंधित करने में असमर्थ है तो किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर की मदद ले सकते हैं।


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